Bihar News: खेत बचाओ अभियान’ से बीमारी हटेगी, पर्यावरण सुधरेगा, धरती मां स्वस्थ होगी और किसानों की खुशहाली बढ़ेगी : विजय कुमार सिन्हा

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Bihar News: बिहार में मिट्टी की सेहत सुधारने, खेती की लागत कम करने और किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करने के लिए राज्य सरकार ने ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत कर दी है। यह अभियान 1 जून से 30 जून तक पूरे राज्य में चलाया जाएगा। अभियान का शुभारंभ पटना के मीठापुर स्थित कृषि भवन से कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में मौजूद किसानों के साथ कृषि मंत्री ने संकल्प लिया कि वे अपने खेत की कम से कम एक चौथाई यानी 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती की शुरुआत करेंगे।

“खेतों की तस्वीर और किसानों की तकदीर बदलेगा अभियान”

अभियान के शुभारंभ के दौरान कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेती और स्वास्थ्य को बचाने की दिशा में एक नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर न केवल मिट्टी की उर्वरता को बचाया जा सकता है, बल्कि लोगों को स्वस्थ भोजन भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और इसके दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में समय की मांग है कि किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें।

किसानों को मिलेगा ₹4,000 प्रति एकड़ का प्रोत्साहन

कृषि मंत्री ने बताया कि नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।

योजना के तहत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को 4,000 रुपये प्रति एकड़ (अधिकतम एक एकड़ तक) प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा जैव उत्पादन संसाधन केंद्र (BRC) स्थापित करने के लिए 1 लाख रुपये तक की सहायता का भी प्रावधान किया गया है।

प्राकृतिक खेती के प्रमाणीकरण के लिए भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त रीजनल काउंसिल के माध्यम से प्रति हेक्टेयर 2,100 रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी किया जाएगा।

38 जिलों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

राज्य सरकार ने सभी 38 जिलों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष क्लस्टर आधारित मॉडल अपनाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 114 नए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जिनमें लगभग 5,700 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया जाएगा।

इस अभियान को सफल बनाने के लिए 800 ‘कृषि सखी’ यानी जीविका दीदियों का चयन किया गया है। इन्हें किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने और तकनीकी सहयोग देने के लिए प्रतिमाह 5,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

हर गांव और पंचायत तक पहुंचेगा अभियान

कृषि विभाग ने इस अभियान को राज्य के हर गांव और पंचायत तक पहुंचाने की तैयारी पूरी कर ली है। अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को “कम खाद, सही खाद और सही सलाह” के मंत्र से जोड़ना है।

इसके तहत किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की जानकारी दी जाएगी। साथ ही हरी खाद, जैविक उत्पादों और प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

खेतों तक पहुंचेंगे कृषि वैज्ञानिक

अभियान के दौरान कृषि वैज्ञानिक सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचेंगे और उन्हें जलवायु परिवर्तन, कम पानी वाली फसलों, फसल विविधीकरण और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी देंगे।

कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि प्रकृति स्वयं खेती का सबसे बड़ा उदाहरण है। जंगलों में बिना रासायनिक खाद के भी पेड़-पौधे स्वस्थ रहते हैं। ऐसे में किसानों को भी प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती की ओर बढ़ना चाहिए।

मिट्टी की सेहत सुधारने पर रहेगा विशेष फोकस

‘खेत बचाओ अभियान’ के दौरान मिट्टी की जांच और मृदा स्वास्थ्य कार्ड पर विशेष जोर दिया जाएगा। विभाग का मानना है कि संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी बल्कि किसानों की लागत भी कम होगी और आय में वृद्धि होगी।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह अभियान खेती को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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