Bihar News: बिहार के किसानों, महिलाओं, युवाओं और श्रमिकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार एक बड़े जनसंवाद अभियान की शुरुआत करने जा रही है। ‘किसान कृषि, महिला उद्यम, युवा रोजगार एवं श्रमिक उत्थान सह जनकल्याण संवाद अभियान’ का शुभारंभ 20 अगस्त को बामेती में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे।
यह जानकारी बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने नई दिल्ली में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की 97वीं वार्षिक आम बैठक में दी। बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, केंद्रीय राज्य मंत्री और विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों ने कृषि अनुसंधान, तकनीक, प्राकृतिक खेती, बीज उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
खेत तक पहुंचेगा कृषि अनुसंधान का लाभ
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार कृषि प्रधान राज्य है और यहां कृषि की संभावनाओं को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रसंस्करण और कृषि निर्यात से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। उनका कहना है कि कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब उसका परिणाम खेत तक पहुंचे और किसानों की उत्पादकता व आय में बढ़ोतरी हो।
उन्होंने बताया कि कम बारिश की स्थिति के बावजूद बिहार में 93 प्रतिशत से अधिक धान की रोपाई पूरी हो चुकी है और राज्य निर्धारित लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
मखाना को लेकर ICAR से विशेष रिसर्च की मांग
बिहार के प्रमुख कृषि उत्पाद मखाना को लेकर भी कृषि मंत्री ने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। उन्होंने मखाना की उन्नत किस्मों के विकास, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीक, कृषि यंत्रीकरण, मूल्य संवर्धन और निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए ICAR स्तर पर विशेष अनुसंधान की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि बिहार के विशिष्ट कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
बाढ़-सुखाड़ से निपटने वाली फसलों पर जोर
बिहार में बाढ़ और सुखाड़ जैसी प्राकृतिक चुनौतियों को देखते हुए कृषि मंत्री ने जलवायु अनुकूल और कम अवधि में तैयार होने वाली फसल किस्मों के विकास पर जोर दिया। साथ ही डिजिटल कृषि तकनीक को छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचाने की जरूरत बताई। महिला किसानों और युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई।
प्राकृतिक खेती और रसायन मुक्त उत्पादन को बढ़ावा
कृषि मंत्री ने बीज उत्पादन और प्राकृतिक खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान की जरूरत बताई। उन्होंने रसायन मुक्त तरीके से फल, सब्जी, दलहन और तिलहन के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान, प्रशिक्षण, बाजार और उचित मूल्य की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।
उनके अनुसार केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों से किसानों को आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जा सकता है।
कृषि पढ़े युवाओं को मिलेगा फोकस
कृषि क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त कर चुके युवाओं को कृषि योजनाओं और कृषि उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी पहल की आवश्यकता बताई गई। कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार कृषि शिक्षा प्राप्त युवाओं को कृषि क्षेत्र से जोड़ने के लिए प्राथमिकता के आधार पर काम कर रही है।
इसका उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाले वर्ग तक सीमित रखने के बजाय उन्हें कृषि उद्यमिता और रोजगार सृजन से जोड़ना है।
सहकारी समितियों से मजबूत होंगे छोटे किसान
लघु एवं सीमांत किसानों को संगठित करने के लिए सहकारी समितियों की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इससे छोटे किसान सामूहिक रूप से कृषि इनपुट खरीदने, उत्पादन बढ़ाने और अपनी उपज के बेहतर विपणन की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से किसानों तक पहुंचाने में भी सहकारी व्यवस्था मददगार हो सकती है।
20 अगस्त से शुरू होगा जनकल्याण संवाद अभियान
बिहार में शुरू होने वाला नया अभियान किसानों के साथ-साथ महिलाओं, युवाओं और श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर भी केंद्रित रहेगा। इसके तहत कृषि, रोजगार, उद्यमिता, ग्रामीण विकास और जनकल्याण से जुड़े विषयों पर संवाद को आगे बढ़ाने की योजना है।
कृषि मंत्री ने ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं का लाभ भी किसानों और ग्रामीण परिवारों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की आवश्यकता बताई, ताकि कृषि आधारित आजीविका और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके।
‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान’ पर जोर
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश कृषि अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान को खेत तक पहुंचाने से ही किसानों की उत्पादकता, आय और जीवन स्तर में स्थायी सुधार संभव है।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार का लक्ष्य कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, कृषि उद्यमिता और निर्यात से जोड़ना है। इससे आत्मनिर्भर और समृद्ध बिहार के निर्माण को नई गति मिल सकती है।

