भारत के मुख्य सरकारी ऑडिटर CAG ने गुरुवार को कहा कि सरकार का ‘ भारतनेट ‘ प्रोजेक्ट अपने मुख्य मकसद में कामयाब नहीं हो पाया। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य देश के हर गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना था ताकि गांवों और शहरों के बीच इंटरनेट की दूरी को खत्म किया जा सके, लेकिन CAG के मुताबिक यह योजना अपने इस बड़े लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकी। इसकी मेन कारण प्लानिंग और उसे लागू करने में कमियां बताई गईं हैं।
12 अगस्त को संसद में पेश किए गए भारतनेट के दूसरे चरण के परफॉर्मेंस ऑडिट पर एक आधिकारिक बयान में CAG ने कहा कि नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है और इसमें टारगेट किए गए 96.70% ग्राम पंचायतों (GPs) को कवर किया गया है। हालांकि, इसे बेहतर तरीके से चलाने, इस्तेमाल करने और रेवेन्यू जेनरेट करने में सफलता नहीं मिली।
CAG ने कहा कि ऑडिट से पता चला है कि भले ही भारतनेट ने इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन डिजिटल अंतर को खत्म करने के अपने बड़े मकसद को पूरा करने में यह पीछे रह गया है। भारतनेट प्रोजेक्ट का विचार अक्टूबर 2011 में आया था और इसे 2012 में बनी एक खास कंपनी, भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (BBNL) के जरिए लागू किया गया। ऑडिटर ने बताया कि उन्हें प्रोजेक्ट की प्लानिंग और उसे लागू करने में कमियां मिलीं। हालांकि दूसरे चरण की प्लानिंग 20 राज्यों (21 सर्कल) में तीन के जरिए की गई थी, लेकिन इसे सिर्फ 13 राज्यों (14 सर्कल) में ही लागू किया जा सका।
आगे ये भी कहा गया कि नवंबर 2025 तक, सर्विस के लिए तैयार ग्राम पंचायतों (GPs) में से सिर्फ 33.20% ही चालू थीं। CAG ने बताया कि इंटरनेट बंद रहने की सबसे बड़ी वजह फाइबर केबल का खराब होना या कट जाना था। कुल बंद पड़े नेटवर्क में से लगभग 48% मामले इसी वजह से थे। इसके अलावा, टूटी हुई केबल को ठीक करने में औसतन 17 दिन का लंबा समय लग जाता था, जिससे साफ पता चलता है कि मरम्मत और देखरेख के काम में बहुत ढिलाई और देरी हुई।

