बीरेंद्र कुमार झा
चीन से बढ़ती चुनौतियों के बीच नौसेना ने अरब सागर में युद्धाभ्यास किया।इसमें दो विमानवाहक पोतों,कई युद्धपोतों, पनडुब्बियों और 35 से अधिक विमानों ने हिस्सा लिया। अरब सागर में हुए इस युद्धाभ्यास में पहली बार आईएनएस विक्रांत और विक्रमादित्य ने साथ-साथ अभ्यास किया।इसे नौसेना के द्वारा हाल के वर्षों में अपने युद्ध कौशल के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक के तौर पर देखा जा रहा है। इससे चीन को भारत के सैन्य क्षमता का स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई है। गौरतलब है कि चीन की विस्तारवादी नीति के कारण सीमा साझा करने वाले सभी देशों के साथ इसके संबंध काफी खराब चल रहे हैं। भारत कई मौके पर चीन के इस नीति के तहत किए जा रहे हरकतों का विरोध भी कर चुका है।
आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य रहे युद्धाभ्यास के केंद्र बिंदु
नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने कहा कि विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत इस युद्धाभ्यास के केंद्र बिंदु रहे। इन पोतों ने मिग-29 के लड़ाकू विमानों और एमएच 60आर व कामोव जैसे हेलीकॉप्टरों के लिए फ्लोटिंग एयरफील्ड के रूप में कार्य किया।
कमांडर विवेक मधवाल ने कहा कि यह अभ्यास हिंद महासागर की सुरक्षा और शक्ति प्रक्षेपण को बढ़ाने की नौसेना के कोशिशों में मील का एक पत्थर है। उन्होंने युद्धाभ्यास की तारीख का खुलासा किए बिना कहा कि कैरियर बैटल ग्रुप ऑपरेशन हाल ही में आयोजित किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि इस युद्धाभ्यास ने समुद्री क्षेत्र में भारत की तकनीकी विशेषज्ञता को प्रदर्शित किया है।
राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए नौसेना की प्रतिबद्धता के लिए क्षमता विस्तार
नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मघवाल ने कहा कि शक्ति प्रदर्शन के दौरान नौ सेना ने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने, क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और समुद्री क्षेत्र में साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय नौसेना ने अरब सागर में 35 से अधिक विमानों के साथ इस मिशन को अंजाम दिया है, जो विशाल समुद्री विस्तार में निरंतर हवाई संचालन सुनिश्चित करने में नौ सेना के जबरदस्त क्षमता का प्रदर्शन करता है और भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हमारी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है ।
नौसेना के प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा तंत्र को मजबूत कर रहा है और देश की रक्षा रणनीति को आकार देने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने में विमानवाहक पोत का महत्व सर्वोपरि रहेगा।

