न्यूज़ डेस्क
देश के 75वें गणतंत्र दिवस पर देश के आन-बान-शान एवं सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखलाते परेड में छत्तीसगढ़ की बस्तर की आदिम जनसंसद-मुरिया दरबार’ की मनोहरी झांकी आकर्षण का केंद्र रही और लोगों की सराहना मिली।
छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिम काल से मौजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था को परिलक्षित करती झांकी के साथ छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों ने परब नृत्य का प्रदर्शन किया और मांदर की थाप के साथ बांसुरी की मधुर तान ने कर्तव्यपथ पर मौजूद जनसमूह को आकर्षित किया। झांकी के सामने के हिस्से में बस्तर के आदिम काल से स्त्री प्रधान जनजातीय समाज को दर्शाया गया था। अपनी पारंपरिक वेशभूषा में एक स्त्री को अपनी बात रखते हुए प्रदर्शित किया गया। बस्तर के रहन-सहन, सौंदर्यबोध और सुसंकारित पहनावे को भी दर्शाया गया।
झांकी के मध्य भाग में बस्तर की आदिम जनसंसद को दर्शाया गया था, जिसे मुरिया दरबार के नाम से जाना जाता है। करीब 600 से अधिक वर्षों से यह परंपरा विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे का हिस्सा है, लेकिन इसकी शुरुआत के प्रमाण आदिम काल के मिलते हैं।
झांकी के पीछे के हिस्से में बस्तर की प्राचीन राजधानी बड़े डोंगर में स्थित लिमऊ राजा नाम के स्थान को दर्शाया गया था। लोककथाओं के मुताबिक आदि काल में जब कोई राजा नहीं था, तब जनजातीय समाज एक नीबू को पत्थर के प्राकृतिक सिंहासन पर रखकर आपस में ही निर्णय ले लिया करता था। इसी परंपरा को बाद में मुरिया दरबार के रूप में विस्तार दिया गया।

