बीरेंद्र कुमार झा
खुफिया सूत्रों ने खुलासा किया है कि पिछले दिनों पुणे में आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) द्वारा गिरफ्तार किए गए दो लोग 26 / 11 के मुंबई आतंकवादी हमलों से भी बड़ा और हाईटेक हमला करना चाहते थे ।खुफिया सूत्रों ने बताया कि 18 जुलाई को एटीएस ने पुणे के व्यस्त इलाके से मोहम्मद इमरान और मोहम्मद यूनुस को गिरफ्तार किया था जो इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत की शाखा एसयूएफए के लिए काम कर रहे थे ।राष्ट्रीय जांच एजेंसी को राजस्थान के एक मामले में इन लोगों की तलाश थी।
आतंकी गुट का सहयोगी भी चढ़ा एटीएस के हत्थे
एटीएस ने शुक्रवार को इमरान और यूनुस की मदद करने के आरोप में रत्नागिरी के पेंडारी के सीमाब नसरुद्दीन काजी को भी गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला है कि मेकेनिकल इंजीनियर काजी ने कोटवा स्थिति ग्राफिक डिजाइनर कादिर दस्तगीर पठान को भी पैसे भेजे थे ।
महत्वपूर्ण स्थानों की हो रही थी रेकी
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इमरान और यूनुस कट्टर इस्लामिक स्टेट (आईएस या आईएसआईएस) का संचालक है। सूत्रों के मुताबिक दोनों संदिग्धों ने पुलिस में कोलाबा स्लम इलाके के पास खाबड़ हाउस और नेवल हेलीपैड सहित महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी की थी। सूत्रों के मुताबिक ये स्थान स्थानिक और रणनीतिक कारणों से बड़े महत्वपूर्ण हैं।इसलिए वहां बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचाना इसका लक्ष्य था। इसके अलावा ये मुंबई के प्रमुख मंदिरों पर हमला करना चाहते थे जहां श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक है।
आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए हाई टेक तरीके से कर रहा था तैयारी
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ये आतंकवादी पनबिजली परियोजनाओं पर भी हमला करना चाहते थे, जो देश के विकास और प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। इनलोगो ने कोलाबा क्षेत्र की कई तस्वीरें खींची थी।इनके पास से हाईटेक नक्शे मिले हैं।हालांकि साजिश की शुरुआती अवस्था में ही वे जांच एजेंसियों के हत्थे चढ़ गए।
खुफिया सूत्रों ने बताया कि उनके लैपटॉप के डाटा से यह भी पता चलता है कि उन्होंने बड़े और लंबे काफिले वालों की वीआईपी मूवमेंट पर काफी रिसर्च किया था। यह समूह बहुत व्यवस्थित ढंग से काम कर रहा था।एक तरफ ये रेकी कर रहे थे तो दूसरी तरफ लोगों को इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) और विस्फोटक बनाने की ट्रेनिंग भी दे रहे थे। उनके ठिकानों से बहुत सारी प्रशिक्षण सामग्री भी जब्त की गई है।

