मुंबई की विशेष NIA अदालत में पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ कथित झूठा हलफनामा दाखिल करने के मामले में 17 अक्टूबर 2026 महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। पूर्व ACP भीमराज गाडगे की ओर से दाखिल याचिका में परमबीर सिंह के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग की गई है। मामले में विस्तृत बहस सुनने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
इस मामले में इससे पहले विशेष NIA अदालत ने परमबीर सिंह द्वारा दाखिल कथित झूठे हलफनामे की जांच के संबंध में कार्यवाही शुरू करते हुए संबंधित नोटरी को नोटिस जारी किया था और आवश्यक रिकॉर्ड तथा CCTV फुटेज के संरक्षण का निर्देश दिया था।
17 अक्टूबर 2026 को परमबीर सिंह की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया। इस पर पूर्व ACP भीमराज गाडगे की ओर से उपस्थित एडवोकेट निलेश सी. ओझा ने लगभग एक घंटे तक विस्तृत कानूनी बहस की।
एडवोकेट निलेश ओझा ने सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए दलील दी कि न्यायिक कार्यवाही में कथित झूठे साक्ष्य और हलफनामे के संबंध में चल रही प्रारंभिक जांच के दौरान संभावित आरोपी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने अथवा ऐसी कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का स्वतः अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह का जवाबी हलफनामा रिकॉर्ड पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और अदालत को उस पर विचार किए बिना कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही करनी चाहिए।
गाडगे पक्ष के अनुसार, अदालत ने इन कानूनी दलीलों पर गंभीरता से विचार किया और सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
बहस के दौरान गाडगे पक्ष के अधिवक्ताओं ने परमबीर सिंह के हलफनामे में दो महत्वपूर्ण कथनों की सत्यता पर गंभीर सवाल उठाए।
पहला आरोप — नोटरी के समक्ष उपस्थित होने और हस्ताक्षर करने का दावा संदिग्ध
गाडगे पक्ष ने दावा किया कि परमबीर सिंह ने हलफनामे पर अपने हस्ताक्षर होने की बात कही है, जबकि संबंधित नोटरी कार्यालय और आसपास के CCTV फुटेज में उनकी कथित उपस्थिति दिखाई नहीं देती।
इसके अतिरिक्त, हलफनामे पर मौजूद दो हस्ताक्षरों में भी अंतर होने का दावा किया गया है। अधिवक्ताओं ने कहा कि इन परिस्थितियों में हलफनामे की प्रामाणिकता, हस्ताक्षरों और नोटरीकरण की प्रक्रिया की जांच आवश्यक है।
दूसरा आरोप — भीमराज गाडगे को अनिल देशमुख का ‘स्टूज’ बताने का दावा झूठा
परमबीर सिंह द्वारा पूर्व ACP भीमराज गाडगे को पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख का ‘स्टूज’ अर्थात कठपुतली बताए जाने पर भी गाडगे पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।
अधिवक्ताओं ने दलील दी कि गाडगे स्वयं अनिल देशमुख के खिलाफ चल रहे मामले में गवाह हैं। ऐसे में उन्हें अनिल देशमुख का कठपुतली बताना तथ्यहीन और उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है।
गाडगे पक्ष ने यह भी बताया कि भीमराज गाडगे दिशा सालियन प्रकरण से संबंधित जांच में CBI के समक्ष भी गवाह हैं। इसी प्रकरण से जुड़े विवाद में दिशा के पिता सतीश सालियन की ओर से हाल ही में ₹2,000 करोड़ का मानहानि दावा दाखिल किए जाने की बात भी अदालत के समक्ष रखी गई।
17 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता निलेश ओझा, अधिवक्ता. तनवीर निज़ाम, अधिवक्ता. अभिषेक मिश्रा, अधिवक्ता. अनुष्का सोनावणे, अधिवक्ता. देवक्रिष्णा भांबरी, अधिवक्ता. शिवम गुप्ता, ॲड. आयुष तिवारी, अधिवक्ता. पायल पडवले तथा अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे। पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे और अन्य आरोपी भी अदालत में मौजूद थे।
गाडगे पक्ष ने अदालत से आग्रह किया कि न्यायिक कार्यवाही में कथित झूठा हलफनामा दाखिल करने जैसे गंभीर आरोपों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता और विश्वसनीयता बनी रहे।
परमबीर सिंह के जवाबी हलफनामे की ग्राह्यता, कथित फर्जी हस्ताक्षरों तथा झूठे हलफनामे से संबंधित कार्यवाही को लेकर अदालत का आगामी आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।फिलहाल अदालत ने आदेश सुरक्षित रखा है।

