बीरेंद्र कुमार झा
वाराणसी के चर्चित ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हाईकोर्ट ने बुधवार को अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी (AIMC) की अपील को खारिज कर दिया और वाराणसी के जिला जज द्वारा 12 सितंबर को दिए गए फैसले को बरकरार रखा। इंतजामिया कमेटी ने हिंदू पक्ष राखी सिंह और अन्य महिलाओं के मामले में वाराणसी जिला अदालत के आदेश पर आपत्ति दाखिल कर यथास्थित बनाए रखने की मांग हाई कोर्ट से की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में पूजा के अधिकार की मांग करने वाली हिंदुओं की याचिका सुनवाई योग्य है। इसके साथ ही अदालत द्वारा मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया गया। हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में नियमित रूप से श्रृंगार गौरी और अन्य देवताओं की पूजा करने की अनुमति मांगी है।
मस्जिद कमेटी की याचिका विचारणीय नहीं
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने प्रतिद्वंदी पक्षों के वकीलों को विस्तार से सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील हरिशंकर जैन ने कहा मुझे उम्मीद है कि वह दिन दूर नहीं जब हम वहां एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण करेंगे और वर्तमान ढांचे को हटा दिया जाएगा।कोर्ट ने साफ साफ कहा है कि अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी की याचिका विचारणीय नहीं है और इसे खारिज कर दिया है। यह फैसला देश के समस्त हिंदुओं के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।
श्रृंगार गोरी की नियमित पूजा का केस चलेगा
12 सितंबर को जिला अदालत द्वारा हिंदू देवी-देवताओं जिनकी मूर्तियां ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित है, की दैनिक पूजा के अधिकार की मांग करने वाली याचिका की सुनवाई के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के बुधवार के आदेश के बाद वाराणसी की अदालत में आप श्रृंगार गोरी की नियमित पूजा का केस चलता रहेगा।
