बीरेंद्र कुमार झा
महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला।एनसीपी नेता अजित पवार ने बगावत कर दी है, जिसके बाद वे एनसीपी के कुछ अन्य विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी राजभवन पहुंचे, जहां शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा रहा है। अजित पवार ने मंत्री पद की शपथ ली है। वे राज्य के दूसरे उपमुख्यमंत्री होंगे। अजित पवार के अलावा एनसीपी के 18 विधायकों भी राजभवन पहुंचे।इनमें से छगन भुजबल और दिलीप वलसे समेत कुछ विद्रोही एनसीपी विधायकों को भी मंत्री बनाया जा रहा है।गौर तलब है कि वर्ष 2019 में भी अजीत पवार ने बगावत कर दी थी। तब उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के साथ तड़के राजभवन में सपथ ले ली थी।हालांकि बाद में शरद पवार के सक्रिय हो जाने के बाद वे वापस आ गए थे और फिर महा विकास आघाड़ी का गठन हुआ और फिर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र में ढाई साल तक सरकार चली थी।
राहुल के साथ जाने का चाचा का फैसला बना अजीत की बगावत की वजह, विधायक भी थे इससे नाराज
महाराष्ट्र एनसीपी में यह बड़ी फूटर है ।अजित पवार ने एक बार फिर चाचा सरकार के खिलाफ बगावत कर दी है ,हालांकि इस बार बगावत में अजित पवार अकेले नहीं है। बताया जा रहा है कि एनसीपी के कई अन्य नेता इस बार अजीत पवार के साथ हैं। इस बगावत की जड़ में शरद पवार का वह निर्णय बताया जा रहा है जिसमें उन्होंने पटना में विपक्षी एकता की बैठक में राहुल गांधी के साथ मंच साझा करने का फैसला किया था। सूत्रों का कहना है कि अजित पवार के साथ गए विधायक शरद पवार के इस फैसले से नाराज थे।
दिन में अचानक बुलाई गई थी बैठक
गौरतलब है कि इससे पूर्व आज दिन में अचानक एनसीपी नेताओं की बैठक अजित पवार के आवास पर बुलाई गई थी। इस बैठक में शामिल होने के लिए एनसीपी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल समेत तमाम नेता वहां पर पहुंचे थे। इस बारे में शरद पवार का कहना है कि यह बैठक किसलिए बुलाई गई है उन्हें इसकी जानकारी नहीं है ।उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता होने के नाते अजीत पवार को विधायकों की बैठक बुलाने का पूरा अधिकार है। वह लगातार ऐसा करते रहे हैं। शरद पवार ने कहा था कि उन्हें मीटिंग के संबंध में बहुत कुछ ज्यादा जानकारी नहीं है।

