दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन के बाद अब ब्रिक्स दिखाएगा दुनिया को अपना दमखम

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर 2026 को भारत की मेजबानी में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं और इसकी मुख्य थीम “Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता) रखी गई है

इस बैठक के दौरान हुई मुख्य और महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं:1. ग्लोबल साउथ (Global South) की मजबूत आवाजप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन भाषण में ज़ोर देकर कहा कि विकासशील देशों (Global South) को अब वैश्विक निर्णयों में केवल नियम मानने वाला (Rule-taker) नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला (Rule-shaper) बनना होगा।

1.संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC Reforms) और वैश्विक वित्तीय संस्थानों (जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक) में सुधार की मांग को मजबूती से उठाया गया।

2. स्थानीय मुद्राओं (National Currencies) में व्यापार को बढ़ावा
अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में करने पर सहमति जताई जा रही है।
सीमा पार भुगतान को आसान बनाने के लिए BRICS Pay System और केंद्रीय बैंकों की डिजिटल करेंसी (CBDC) को आपस में जोड़ने पर गंभीर चर्चा हुई।

3. द्विपक्षीय बैठकें (Bilateral Meetings) और बड़े नेताओं की वापसी
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल के लंबे अंतराल के बाद भारत दौरे पर आए हैं, जिससे भारत-चीन व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने पर चर्चा हुई।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पीएम मोदी के बीच विशेष द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा और सिविल न्यूक्लियर सहयोग को बढ़ाने पर बात हुई।
ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने भी बैठक में हिस्सा लिया और अमेरिका के प्रतिबंधों व मध्य-पूर्व संकट पर अपनी बात रखी।
4. तकनीकी और आर्थिक सहयोग
भारत इनोवेट्स (Bharat Innovates) प्रदर्शनी: शिखर सम्मेलन के दौरान ‘डीपटेक’ (DeepTech) प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जहाँ डिजिटल कृषि, स्वास्थ्य, स्टार्टअप और नई तकनीकों का प्रदर्शन हुआ।
गवर्नेंस: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित उपयोग और इसके वैश्विक नियमों को तय करने के लिए ब्रिक्स देशों ने सहमति जताई।
5. विस्तारित ब्रिक्स (Expanded BRICS) का नया रूप
अब ब्रिक्स केवल 5 देशों का समूह नहीं रहा। इस सम्मेलन में नए पूर्ण सदस्य देशों—मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया सहित कुल 11 देशों के मजबूत संगठन के रूप में आर्थिक रणनीतियों पर मंथन हुआ। ये देश मिलकर दुनिया की लगभग 49.5% आबादी और 40% वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी दे दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की। पीएम मोदी ने शिखर सम्मेलन में कहा कि किसी भी सदस्य ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया है।
नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 में क्या है?
रॉयटर्स के अनुसार, संयुक्त घोषणापत्र में संघर्ष को रोकने के प्रयासों, जिसमें उनके मूल कारणों को संबोधित करना भी शामिल है, पर जोर दिया गया।
इसमें बातचीत, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए ब्रिक्स देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।
घोषणापत्र में एक ऐसे बहुपक्षीय दृष्टिकोण की वकालत की गई जो महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विभिन्न राष्ट्रीय दृष्टिकोणों और स्थितियों का सम्मान करता है
संयुक्त बयान में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों में वृद्धि के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की गई, जो व्यापार को बाधित करते हैं और WTO के नियमों के अनुरूप नहीं है।
संयुक्त बयान पर ब्रिक्स देशों में आम सहमति
ब्रिक्स देश शनिवार सुबह 4 बजे तक चली गहन बातचीत के बाद एक संयुक्त बयान पर आम सहमति पर पहुंचे। बातचीत के दौरान कई विवादास्पद मुद्दों पर मतभेद सामने आए। भारत ने परस्पर विरोधी स्थितियों को पाटने और सदस्यों के बीच आम सहमति बनाने के लिए लगातार विचार विमर्श करता रहा।।

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