UPI पर MDR चार्ज का निकाला जुगाड़, 1999 रुपये में पेमेंट को तोड़ रहा One999 पोर्टल

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MDR की वजह से UPI लगातार चर्चा में है। इस बीच X पर किसी ने दावा किया है कि उसने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना लिया है, जो किसी भी बिल को 1,999 के छोटे-छोटे QR कोड्स में बांट सकता है। पोस्ट करने वाले यूजर का दावा है कि इससे 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर लगने जा रहे MDR से बचा जा सकता है। इस प्लेटफॉर्म का नाम One999 है।

हालांकि सवाल उठता है कि क्या वाकई में इस तरह का कोई प्लेटफॉर्म है? क्योंकि अपने पोस्ट में @aspizu_ नाम के यूजर ने एक लिंक भी उपलब्ध कराया है। इस लिंक पर क्लिक करने पर एक वेबसाइट खुलती है, जहां आप UPI ID, नाम और अमाउंट दर्ज कर 1999 रुपये के QR कोड जेनरेट कर सकते हैं।

दरअसल aspizu_ नाम के एक यूजर ने X पर एक लिंक शेयर कर बताया है कि उसका यह प्लेटफॉर्म किसी भी अमाउंट को 1999 रुपये के अलग-अलग QR कोड में बांट देता है।

मसलन अगर आपको 10000 रुपये की मर्चेंट UPI पेमेंट करनी हो, तो यह 6 QR बनाकर देगा। इसमें से 5 QR कोड 1999 रुपये के और एक कोड 5 रुपये की पेमेंट का होगा। इस तरह से पेमेंट को MDR से मुख्त रखने की बात की जा रही है।

पोस्ट में एक लिंक दिया गया है, जो सीधे One999 के प्लेटफॉर्म पर पहुंचा देता है। यहां आपको अपनी UPI ID, नाम, अमाउंट और पेमेंट नोट दर्ज करना होता है।
इसके बाद Generate QR Codes पर क्लिक करके 1999 रुपये के QR कोड्स जेनरेट किए जा सकते हैं।​

इस वेबसाइट या पोर्टल को यूजर ने प्रैंक के तौर पर शेयर किया है। अपने पोस्ट में उन्होंने अलग से इस बात का जिक्र किया है कि यह सिर्फ एक मजाक है लेकिन जब हमने इस पोर्टल को टेस्ट किया, तो यह ठीक उसी तरह से काम करते दिखा जिस मकसद से इसे बनाया गया है।
कहने का मतलब है कि अगर आप पोर्टल पर अपनी UPI ID सही-सही दर्ज करते हैं और QR कोड्स बनाते हैं, तो उन कोड्स पर असल में पेमेंट की जा सकती है। ऐसे में इस पोर्टल को प्रैंक कहा जाना कहां तक सही होगा?
हालांकि इस पोर्ट्ल की सेफ्टी को जांचा नहीं जा सका है, ऐस में आम लोगों या व्यापारियों को इसके इस्तेमाल से बचना चाहिए।​

इस पोस्ट पर लोग भारी संख्या में कमेंट कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह प्रैंक हो या हकीकत लेकिन मार्केट में एक आइडिया तो पिच कर ही दिया गया है कि इस तरह का ऐप बनाया जा सकता है।

वहीं कुछ लोग इसे टैक्स चोरी करार दे रहे हैं, तो बाकियों का कहना है कि यह टैक्स चोरी कैसे हो सकती है क्योकि सरकार इसे खुद ही टैक्स नहीं मानती।

इसके अलावा कुछ यूजर्स ने अपने ऐप और प्लेटफॉर्म के लिंक शेयर करते हुए लिखा कि वे इस फीचर को अपने पोर्टल पर जोड़ रहे हैं।

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