बीरेंद्र कुमार झा
उड़ीसा के बालासोर में रेल हादसे के जख्म से लोग अभी तक पूरी तरह से उबर नहीं पाए हैं। भारतीय रेल के सबसे बड़े हादसों में से एक कोरोमंडल एक्सप्रेस रेल दुर्घटना में सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गवाई। एक पल में लोगों ने अपनों को खो दिया। अभी भी कई लोग प्रियजनों के शवों की आस में भटक रहे हैं। ऐसी एक दुख भरी कहानी है बिहार के युवक की जिसे तकरीबन 3000 किलोमीटर तक भटकने पर 2 हफ्ते बाद अपने लापता भाई का शव मिला। दरअसल इसके भाई का शव गलती से पश्चिम बंगाल के एक परिवार के पास चला गया था, जिसे प्राप्त करने के लिए इसे इतना भटकना पड़ा।
भाई राजा की तलाश
बिहार के पूर्वी चंपारण जिला के मोतिहारी ब्लाक के अंतर्गत लखौरा गांव का रहने वाला 22 वर्षीय राजा अपने कुछ साथियों के साथ दुर्घटना के दिन 2 जून को चेन्नई जाने वाले कोरोमंडल एक्सप्रेस में सवार हुआ था।इस समूह के 8 -,10 लोगों को मामूली चोट आई और वे लोग बच गये, लेकिन राजा की मौत हो गई।
राजा के भाई सुभाष के मुताबिक हादसे वाले दिन शाम 4:00 बजे उसकी अपने भाई से बात हुई थी हादसा मोतिहारी से करीब 800 किलोमीटर दूर बालासोर में शाम करीब 7:00 बजे हुआ।हादसे की खबर सुनते ही सुभाष और उसके परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। सुभाष अपनी मां लीलावती देवी और गांव के 8 लोगों के साथ ₹40000 में एक वाहन किराए पर लेकर बालासोर के लिए निकल पड़ा। उसे हादसे वाली जगह पहुंचने में 1 दिन लगा।
पैसे खत्म हो गए पर जारी रही तलाश
सुभाष ने आगे बताया कि उसने 3 दिनों तक विभिन्न अस्पतालों में अपने भाई राजा की तलाश की लेकिन वह नहीं मिला।इसके बाद इन लोगों ने घर लौटने का फैसला किया क्योंकि इनके पास के सारे पैसे खत्म हो गए थे। सुभाष हिमाचल प्रदेश के टापरी में राजमिस्त्री का काम करता है। पटना में सुभाष ने अपने भाई के लापता होने के बारे में बिहार सरकार की हेल्प डेस्क को सूचित किया था, लेकिन वहां से कोई बात नहीं बनी। सुभाष फिर से अपने परिवार के कुछ सदस्यों के साथ उड़ीसा गया। इस बार वह भुवनेश्वर का गया, जहां उन्हें पता चला कि कई सर्वे रखे गए हैं।
पता लगा पश्चिम बंगाल भेज दिया गया है शव
सुभाष ने बताया कि एक एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित मृतक की तस्वीरों में से इसने राजा को पहचान लिया, उसके बाएं हाथ पर एक टैटू था।वहां मौजूद अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल के किसी व्यक्ति ने पहले ही सफर दावा किया था, इसलिए शव पश्चिम बंगाल भेजा जा चुका है।
डीएनए सैंपल भेजा
सुभाष ने बताया कि इस बात की जानकारी मिलने के बाद कि उसके भाई का शव बंगाल भेज दिया गया है, उसे यह नहीं सूझ रहा था कि आगे क्या किया जाए।इसके बाद सुभाष ने बिहार के पुलिस अधिकारी से संपर्क किया, जो एम्स भुवनेश्वर में प्रतिनियुक्त था। अधिकारी की सलाह पर सुभाष की मां ने डीएनए जांच के लिए रक्त के नमूने दिए उन्हें डीएनए रिपोर्ट आने तक इंतजार करने को कहा गया।
शुक्रवार को राजा के शव को पश्चिम बंगाल के काकद्वीप से वापस भुवनेश्वर लाया गया। जब शव लेने वाले परिवार को राजा का आधार कार्ड उसकी पेंट की जेब में मिला तो उसने इस शव को वापस लौटाने में कोई आनाकानी नहीं की।सुभाष ने कहा कि आधार कार्ड के अलावा हमने पहले ही अधिकारियों को उनके बाएं हाथ में टैटू के बारे में सूचित कर दिया था।
रेलवे की तरफ से सुभाष के परिवार को ₹10 लाख का मुआवजा मिला है।सुभाष ने कहा कि अब तक उन्हें बिहार सरकार से कोई सहायता नहीं मिली है। उसने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि हमारी सरकार पश्चिम बंगाल सरकार की तरह हमारे परिवार के एक सदस्य को नौकरी देगी।

