गोलमोल फूला पेट,मोटापा या गैस नहीं,पेट में पानी भरने का भी होता है सिग्नल,क्यों बनता है ये पानी?

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पेट का अचानक फूलना या लगातार पेट का आकार बढ़ना कई कारणों से हो सकता है। लेकिन अगर पेट के अंदर असामान्य मात्रा में फ्लूइड जमा होने लगे, तो इसे मेडिकल भाषा में एसाइटिस कहा जाता है। यह खुद कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में मौजूद किसी दूसरी बीमारी या समस्या का संकेत हो सकता है। इसका कारण गंभीर लिवर रोग और उससे जुड़ी अन्य समस्याएं जैसे हार्ट फेलियर, किडनी डिजीज, कैंसर, पैंक्रियाज से जुड़ी समस्याएं भी एसाइटिस का कारण बन सकती हैं। इसलिए पेट में पानी भरने की शिकायत को केवल गैस, मोटापा या सामान्य पेट फूलने की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर अगर पेट का आकार लगातार बढ़ रहा हो, पैरों में सूजन, वजन बढ़ना, भूख कम होना या सांस लेने में परेशानी भी हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

एसाइटिस का मतलब है पेट में कैविटी यानी पेट के अंदर मौजूद पैरिनोइयल कैविटी में असामान्य मात्रा में फ्लूइड जमा होना। सामान्य परिस्थितियों में इस जगह बहुत थोड़ी मात्रा में फ्लूइड मौजूद होता है, जो पेट के अंगों के बीच घर्षण कम करने में मदद करता है। समस्या तब होती है जब यहां फ्लूइड की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है।

जॉन्स हॉपकिन्स के मुताबिक शुरुआत में फ्लूइड कम होने पर व्यक्ति को कोई खास लक्षण महसूस नहीं हो सकते। जैसे-जैसे मात्रा बढ़ती है, पेट का आकार बढ़ने लगता है और पेट भारी या तना हुआ महसूस हो सकता है। ज्यादा फ्लूइड जमा होने पर पेट में दबाव बढ़ सकता है और कुछ लोगों को सांस फूलने की शिकायत भी हो सकती है। इसका मुख्य और कॉमन कारण पोर्टल हाइपरटेंशन है, जो अक्सर लिवर सिरोसिस से जुड़ा होता है, लेकिन इसके अलावा कई नॉन लिवर कंडिशन्स भी इसके पीछे हो सकती है

मैयोक्लीनिक के अनुसार एसाइटिस का सबसे कॉमन कारण लिवर से जुड़ी बीमारी है। लंबे समय तक लिवर में प्रभावित होने पर सिरोसिस विकसित हो सकता है। सिरोसिस में पोर्टल हाइपरटेंशन और शरीर में फ्लूइड रेगुलेशन में बदलाव एसाइटिस को जन्म दे सकते हैं। एसाइटिस का विकसित होना सिरोसिस में लिवर की क्षति का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को पहले से सिरोसिस है और अचानक पेट बढ़ने लगे, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

एनसीबीआई के अनुसार कुछ लोगों में हार्ट फेलियर के कारण भी शरीर में फ्लूइड जमा होने लगता है। जब हार्ट पर्याप्त प्रभावी ढंग से ब्लड सर्कुलेट नहीं कर पाता, तो शरीर में नसों पर दबाव और फ्लूइड रिटेनशन बढ़ सकते हैं। इससे पैरों में सूजन के साथ कुछ मामलों में पेट में भी फ्लूइड जमा हो सकता है। हार्ट फेलियर से जुड़ी एसाइटिस में सांस फूलना, पैरों में सूजन जैसे लक्षण साथ में दिखाई दे सकते हैं।

किडनी शरीर में फ्लूइड और सोडियम बैलेंस बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गंभीर किडनी डिजीज में फ्लूइड बैलेंस बिगड़ सकता है और शरीर में पानी जमा होने की समस्या हो सकती है। कुछ स्थितियों, जैसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम में प्रोटिन लॉस और लॉ एलबूमिन भी फ्लूइड एक्यूमिलेशन में योगदान कर सकते हैं। इसलिए अगर पेट फूलने के साथ चेहरे या पैरों में सूजन यूरिन में बदलाव या वजन तेजी से बढ़ रहा है तो किडनी की जांच जरूरी हो सकती है।

नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार कुछ प्रकार के कैंसर्स भी एसाइटिस का कारण बन सकते हैं। कैंसर सेल्स परिटोनियम को प्रभावित कर सकते हैं या शरीर में ऐसे बदलाव पैदा कर सकते हैं जिनसे पेट में फ्लूइड जमा होने लगे। इसे कई बार मैलिगेंट एसाइटिस कहा जाता है। ब्लैडर, ब्रेस्ट, कोलन, लिवर, लंग, ओवरियन, पैंक्रियाटि, पेट और या गर्भाशय के कैंसर से पीड़ित लोगों में एसाइटिस सबसे आम है। कैंसर कोशिकाएं पेरिटोनियम से अत्यधिक तरल पदार्थ के रिसाव का कारण बन सकती हैं।

एनसीबीआई के अनुसार पैंक्रियाज में सूजन भी कुछ मामलों में एसाइटिस का कारण बन सकता है। इसके अलावा पेरियोनियम का संक्रमण या इंफ्लेमेशन, लिम्फेटिक से जुड़ी समसयाओं और कुछ अन्य पेट से जुड़ी समस्याओं से पेट में फ्लूइड जम हो सकता है।

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