अखिलेश अखिल
कहने को तो बिहार में राजद और जदयू के भीतर राजनीतिक उबाल कुछ ज्यादा ही दिख रहा है लेकिन सच तो यही है बीजेपी की परेशानी कुछ ज्यादा ही बढ़ी हुई है। बीजेपी की परेशानी की वजह से ही राजद और जदयू के भीतर चल रहे रार की कथित कहानी सामने आती है लेकिन नीतीश की राजनीति के सामने सब फेल हो जा रहे हैं। अबकी बार नीतीश और लालू प्रसाद के बीच का बॉन्डिंग कुछ अलग तरह का है। यह बॉन्डिंग अटूट है और परिपक्व भी। उधर उपेंद्र कुशवाहा के सहारे जो खेल होता दिख रहा है वह भी किसी प्लांट से कम नहीं। बीजेपी तो चाहती है कि जदयू टूट जाए। बीजेपी को राजद से जितनी परेशानी नहीं है उससे से कही ज्यादा परेशानी जदयू से है। जदयू के अलग होने से बीजेपी बेजार है। उसकी जमीन खिसक गई है।
सी वोटर और इंडिया टुडे के हालिया ने बीजेपी की नींद उड़ा रखी है। सर्वे के मुताबिक बिहार में बीजेपी का तगड़ा नुकसान होने जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए का जादू चलता दिखाई दे रहा है। सर्वे के मुताबिक बिहार में 2019 के मुकाबले 2024 में यूपीए की सीटें 25 गुना ज्यादा बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। सर्वे के मुताबिक जिस यूपीए को पिछले लोकसभा चुनाव में मात्र एक सीट मिली थी 25 से ज्यादा सीटें मिलने की बात कही जा रही है। पिछले चुनाव में बीजेपी और जदयू साथ लड़े थे और बिहार की 40 सीटों में से 39 सीटें इनके हाथ लगी थी। मात्र एक सीट कांग्रेस को मिल पायी थी।
कहा जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जेडीयू भी एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। तब चुनाव में राज्य में प्रचंड लहर देखी गई थी और 40 लोकसभा सीट में से 39 एनडीए को गई थी। अब जेडीयू महागठबंधन का हिस्सा है और इसका असर चुनाव पर भी पड़ता दिखाई देने लगा है। बिहार की अधिकतर आबादी आज राजद -जदयू गठबंधन के साथ खड़ी दिख रही है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि नीतीश कुमार अब बीजेपी के कोर वोट बैंक को भी तोड़ने में लगे हैं। ऐसा होता है तो बीजेपी को बड़ा नुक्सान बिहार में हो सकता है। उधर तेजस्वी यादव तो यहां तक कहते है कि बीजेपी को पांच सीट भी मिल जाए तो बड़ी बात होगी। हालांकि हालिया सर्वे में बीजेपी गठबंधन को 15 सीटें मिलती दिख रही है। बीजेपी गठबंधन में चिराग भी शामिल हो सकते हैं।
सर्वे के मुताबिक बिहार में यूपीए को 47 प्रतिशत वोट मिलता दिखाई दे रहा है। छह महीने पहले अगस्त 2022 में भी सी वोटर ने ऐसा ही सर्वे किया था। तब यूपीए को महज 5 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान लगाया गया था और शून्य सीट मिल रही थी। वोट प्रतिशत बढ़ने का असर सीटों पर भी दिखा है। जनवरी 2023 के सर्वे में कांग्रेस के गठबंधन की लोकसभा सीटें 2019 में एक के मुकाबले बढ़कर 25 हो गई हैं। छह महीने में 25 सीटों की बढ़त कांग्रेस के लिए बड़ी खुशखबरी है।
सर्वे में देश में एक बार फिर से बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की सरकार बनती बताई गई है। हालांकि, सीटों में कमी आई है. एनडीए को 298 सीट मिलती दिखाई गई हैं। इसमें बीजेपी को 284 सीट, जबकि 14 सीटें सहयोगियों को मिलने का अनुमान लगाया गया है। सीटों के आंकड़े देखें तो एनडीए को बड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा है। 2019 में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए ने 353 सीटें जीती थीं. एनडीए की सीटों में गिरावट बीजेपी की टेंशन बढ़ाने वाली है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए़ को 153 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। यूपीए को 30 फीसदी वोट मिलते दिखाए गए हैं. 2019 में यूपीए को 91 सीट मिली थी।

