कल संसद भवन के परिसर से एक दिलचस्प तस्वीर और वीडियो निकाल कर आई और देशभर में चर्चा की विषय वस्तु बन गई। चर्चा की विषय वस्तु इसलिए बन गई, क्योंकि अब तक ये दोनों नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे थे। राहुल गांधी पीएम मोदी पर एप्सटीन फाइल में नाम शामिल होने और वोट चोरी तथा अन्य मुद्दों को आधार बनाकर शब्द प्रहार कर रहे थे, तो पीएम मोदी राहुल गांधी पर नेशनल हेराल्ड जैसे कई मामले मैं बेल पर चलने और कई अन्य आरोप लगाकर शब्द प्रहार कर रहे थे। राहुल गांधी और पीएम मोदी को लेकर स्थिति तो यहां तक बिगड़ गई थी कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के अवसर पर देश की शान तिरंगा लहराने के राष्ट्रीय कार्यक्रम में जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झंडोत्तोलन करना था, उसमें ना तो राहुल गांधी पहुंचे और न हीं कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे। ऐसे में ये दोनों नेता संसद भवन परिसर में आपस में मिलेंगे, कोई इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकता था,तभी तो इस तस्वीर के बाहर आने के बाद लोगों को इस पर आश्चर्य होने लगा।
कल 11 अप्रैल 2026 को संसद भवन परिसर में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर एक विशेष पुष्पांजलि और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में ही हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आए थे और राहुल गांधी भी। इसी कार्यक्रम में दोनों की मुलाकात हुई ,कुछ बात हुई ,जिसकी तस्वीर जब बहार आई तो वह मेन स्ट्रीम मीडिया और सोशल मीडिया दोनों में छा गई।
संसद परिसर में या अन्य जगहों पर ऐसे बहुत सारे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आते हैं और राहुल गांधी भी आते हैं। लेकिन ऐसे कार्यक्रमों में दोनों आकर भी आपस में दूरी बनाए रखते हैं, कभी स्थान को लेकर तो कभी समय को लेकर। लेकिन इस बार यह अंतर पट गया या पाट दिया गया। सारे अंतरों को मिटाकर पीएम मोदी और राहुल गांधी न सिर्फ आपस में मिले बल्कि आपस में बातें भी की।
इस मुलाकात की पहल अगर राहुल गांधी ने की होती तो लोग इसे एक सामान्य घटना मान सकते थे ,क्योंकि राहुल गांधी अक्सर अपने मस्खरे वाले अंदाज के लिए जाने जाते हैं। आपको याद होगा वर्ष 2018 ईस्वी में लोकसभा में घटी वह घटना जिसमें राहुल गांधी ने अप्रत्याशित रूप से एकाएक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झप्पी ले ली थी, जिससे कुछ क्षण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असहज भी हो गए थे। लेकिन ऐसा कर भी राहुल गांधी बिल्कुल सहज बने हुए थे, न सिर्फ सहज थे बल्कि उसी दिन उन्होंने एक महिला सांसद की तरफ देखते हुए आंख मटका कर अभद्र इशारे भी किये थे।
लेकिन कल राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच के हुई मुलाकात में पहल राहुल गांधी ने नहीं,बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी ने की थी। ज्योतिबा फुले के जन्मोत्सव में श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए कार से जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब वहां राहुल गांधी को कुछ नेताओं के साथ देखा तो अपनी कार रोक कर उतर गए और प्रणाम की मुद्रा में राहुल गांधी की तरफ बढ़े। और राहुल गांधी से बातचीत की। और इन दोनों के बीच बातचीत भी क्या हुई जानकर आपको आश्चर्य लगेगा कि लंबे समय के बाद दोनों नेताओं की मुलाकात हुई भी तो उसमें देश हित के किसी मुद्दे को लेकर नहीं ,बल्कि सोनिया गांधी के स्वास्थ्य को लेकर हुई ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी से सोनिया गांधी के स्वास्थ्य को लेकर सवाल किये,जिसके जवाब में राहुल गांधी ने सब कुछ ठीक होने की बात बताई। अब आप अंदाजा लगा लीजिए कि क्या सिर्फ यही बात करने के लिए नरेंद्र मोदी अपनी कार रुकवा कर राहुल गांधी से मिले होंगे। यह तो हाथी का दिखने वाला दांत था। क्योंकि कुछ दिन पूर्व सोनिया गांधी बीमार पड़ी थी और अस्पताल में भर्ती हुई थी। फिर वहां से रिलीज भी कर दी गई। इस बात की मेडिकल बुलेटिन भी जारी हुई होगी और नहीं तो कम से कम मेंन स्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक में तो यह खबर आई ही थी। और पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे ना देखा हो यह तो कतई संभव नहीं ।
यों तो राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस मुलाकात को सामान्य शिष्टाचार बताया जा रहा है। लेकिन पीएम मोदी के द्वारा इस मुलाकात में पहल करने से यह बात तो स्पष्ट है कि इसके अंदर पीएम मोदी ने कोई बड़ा ना बड़ा राज जरूर छुपा लिया है, जिसके सहारे वे राहुल गांधी से भी अपना राजनीतिक हित साध सकते हैं।
पहले इस मुलाकात के समय को देखिए। यह मुलाकात तब हो रही है जबकि असम पुडुचेरी और केरल में चुनाव संपन्न हो गए हैं, जहां राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी को लेकर सक्रिय थे। अब बाकी बचे चुनाव जो पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में होना है उसमें कांग्रेस की स्थिति ऐसी नहीं है जिसके लिए राहुल गांधी जी तोड़ मेहनत करें और तनाव लें। रही बात नरेंद्र मोदी की तो हवे तो 24 * 7 चुनावी मोड में ही रहते हैं। लिहाजा उन्हें तो कोई तनाव होना ही नहीं है और जब कोई चाल चलकर अपना काम निकालना हो तो सहज से भी सहज होना पड़ता है। और पीएम नरेंद्र मोदी को इसमें महारत हासिल है। लिहाजा उन्होंने अपनी चाल को सफल बनाने के उद्देश्य से राहुल गांधी से मुलाकात कर ली और उनकी मां के स्वास्थ्य को लेकर दो-चार बात कर ली। दरअसल इसके जरिए उनका प्रयास यह है कि आगामी दिनों में राहुल गांधी यह सोचकर कि जब प्रधानमंत्री होकर नरेंद्र मोदी ने खुद उनसे मिलने की पहल की तो फिर यह कैसे उन्हें खरी खोटी सुनाते रहेंगे थोड़ा नरम पड़ जाएं।
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी से ही 2029 में होने वाले आम चुनाव मैं जीत हासिल करने के लिए योजना बनाने और उसे लागू करने में जुट गए हैं। दरअसल जिस प्रकार से 2024 ई के हुए आम चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब अबकी बार 400 पर का नारा लगा रहे थे , और अपने बूते साधारण बहुमत भी नहीं जुटा पाए और उनके सांसदों की संख्या 240 पर सीमित कर रह गई। इसमें बड़ी भूमिका राहुल गांधी की रही थी ,जिस कारण कांग्रेस ने अपनी सांसदों की संख्या बढ़ाकर 99 कर ली थी और राहुल गांधी ने भी नेता प्रतिपक्ष का पद धारण कर लिया।
2029 ई के चुनाव में अनिवार्य जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी जिन खास तिकड़मों को अपनाती है उसमें महिलाओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास सबसे महत्वपूर्ण है। उज्ज्वला योजना, लखटकिया बहन योजना लाडली बहन योजना जैसी कई योजनाएं बीजेपी ने जब से नरेंद्र मोदी ने 2014 मैं प्रधानमंत्री का पद संभाला है तब से केंद्र और बीजेपी शासित राज्यों में चलाती आ रही है और इसकी मदद से 2024 के पूर्व वाले चुनाव में स्पष्ट बहुमत पाने में सफल होती रही। लेकिन इन तमाम तिकड़मों के बावजूद 2024 के आम चुनाव में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एनडीए के कई घटक जिसमें कुछ नए घटक भी शामिल थे के सहारे प्रधानमंत्री की डगमगाती कुर्सी पर बैठने पड़ी।
ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं की आधी आबादी का भरोसा जीतने के लिए एक नई चाल लेकर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह चाल है महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम – 106वां संविधान संशोधन) जो पूर्व के निर्णय के अनुसार 2034 के चुनाव से लागू होना था, उसे वर्ष 2029 के चुनाव में ही लागू करना। और इसके लिए नरेंद्र मोदी की सरकार इसमें संशोधन वाली एक बिल 16 अप्रैल को संसद के पटल पर रखेगी।
बेशक पीएम मोदी के पास एनडीए के रूप में लोकसभा में बहुमत प्राप्त है, राज्यसभा से भी यह इसे पारित करवा लेगी और नहीं तो कम से कम जॉइंट सेशन में इसे पास करने का माद्दा रखती ही है। यहां तक राहुल गांधी नरेंद्र मोदी का कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं। लेकिन संविधान संशोधन विधेयक होने के नाते इसमें कुछ पेंच ऐसे हैं, जहां राहुल गांधी लंगड़ी लगा सकते हैं।
संसद में पारित होने के बाद इस अधिनियम को विभिन्न राज्यों के विधानसभा में भी पारित कराने की जरूरत होगी। वैसे तो देश की ज्यादातर राज्यों में बीजेपी की प्रत्यक्ष या सहयोगियों के साथ वाली सरकार है। लेकिन हिमाचल प्रदेश कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी की अपनी सरकार है और झारखंड में जेएमएम के गठबंधन के साथ इसकी सरकार है। राहुल गांधी नरेंद्र मोदी के महिलाओं को अपने पक्ष में करने के इस प्रयास वाले चाल में इन राज्यों में रोड़ा अटका सकते हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा खुद पहल कर राहुल गांधी से इस समय मुलाकात करने और उनकी मां सोनिया गांधी को लेकर हाल-चाल पूछने के पीछे एक प्रमुख राज्य यह भी है ।अब राहुल गांधी पीएम मोदी के द्वारा चले गए इस दांव को शिकस्त देने के लिए कोई चाल चलते हैं या पीएम मोदी के झांसे में आ जाते हैं या तो वक्त ही बताएंगा।

