सीएम अरविंद केजरीवाल पर क्यों बंट गई कांग्रेस?

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बीरेंद्र कुमार झा

कांग्रेस नेताओं में आपसी मतभेद कोई नई बात नहीं है,लेकिन बीते कई सालों में ऐसा शायद पहली बार है कि कांग्रेस नेतृत्व के किसी रणनीतिक कदम के खिलाफ पार्टी नेता बयान दे रहे हैं। विवाद की जड़ में दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल हैं जिन्हें मिले सीबीआई के समन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने फोन कर दिया और कांग्रेस के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई। दिल्ली से लेकर पंजाब तक के कांग्रेस नेता पार्टी नेतृत्व के इस कदम से कन्फ्यूजन में आ गए।आखिरकार विरोध की आवाज उठाई पूर्व केन्द्रीय मंत्री अजय माकन ने।

कांग्रेस और केजरीवाल के बीच बर्फ पिघल रही है

दरअसल कथित शराब घोटाले की जांच के सिलसिले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को सीबीआई का समन आया तो कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे से ने उन्हें फोन किया। कांग्रेस मोदी सरकार पर विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाती रही है।जाहिर है खड़गे का फोन आना, केजरीवाल को कांग्रेस के समर्थन के रूप में देखा गया। इससे पहले जब राहुल गांधी को मानहानि मामले में दो साल की सजा हुई और उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द की गई तब अरविंद केजरीवाल ने भी खुल कर राहुल के पक्ष में बयान दिया था।संसद में और फिर खड़गे के घर हुई विपक्षी दलों की बैठक में भी आम आदमी पार्टी लगातार शामिल हुई।साफ है कि विपक्षी एकजुटता और लोकसभा चुनाव में संभावित गठबंधन के मद्देनजर कांग्रेस और केजरीवाल नजदीक आ रहे हैं।

खड़गे की पहल पर क्यों गर्म हुए अजय माकन?

कांग्रेस और आप की इस नजदीकी को बड़ा झटका देते हुए दिल्ली कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल अजय माकन ने बयान जारी कर कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे केजरीवाल का समर्थन नहीं करना चाहिए।माकन ने आबकारी नीति मामले की जांच को जरूरी बताया और आरोप लगाया कि केजरीवाल ने भ्रष्टाचार की कमाई को कई राज्यों के चुनावी में कांग्रेस के खिलाफ ही इस्तेमाल किया है। माकन ने बिना नाम लिए अभिषेक मनु सिंघवी जैसे कांग्रेस नेता जो केजरीवाल सरकार के लिए अदालत में पेश होते हैं, से ऐसा ना करने की अपील भी की।

केजरीवाल को खड़गे के फोन और माकन के बयान पर कांग्रेस कुछ भी बोलने से बच रही है। हालांकि पार्टी के उच्च सूत्र इन बयानों को निजी राय करार दे रहे हैं। लेकिन कांग्रेस आधिकारिक रूप से ना तो केजरीवाल का समर्थन कर पा रही है ना ही अपने नेताओं के बयानों का खंडन।

संदीप दीक्षित ने भी केजरीवाल के खिलाफ खोला मोर्चा

माकन से पहले दिल्ली कांग्रेस के नेता संदीप दीक्षित ने केजरीवाल को भ्रष्ट और माफिया करार दे दिया है।उनका कहना है कि खड़गे विपक्षी एकता की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दिल्ली कांग्रेस केजरीवाल के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी।

कई राज्यों के कांग्रेस नेता चाहते हैं केजरीवाल से दूरी

प्राप्त जानकारी के अनुसार पंजाब से लेकर गुजरात तक के कांग्रेस नेता अंदरखाने माकन का समर्थन कर रहे हैं।पंजाब की भगवंत मान सरकार कांग्रेस के पूर्व सीएम और कई मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। गुजरात के कांग्रेस नेता बीते विधानसभा चुनाव में हुई दुर्गति के पीछे भी आम आदमी पार्टी को वजह मान रहे हैं।

दरअसल कांग्रेस नेतृत्व का ध्यान अगले लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दलों को एक करने पर है। लेकिन जो नेता अरविंद केजरीवाल को समर्थन देने के पक्ष में नहीं हैं, उनकी दलील है कि दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी ने ही कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया है। जिस कथित शराब घोटाले पर इतना बवाल मचा है उसे सबसे पहले दिल्ली कांग्रेस ने ही उठाया था।

इसके अलावा पूर्व में केजरीवाल ने गांधी परिवार के खिलाफ कई चुभने वाले बयान दिए हैं।आम आदमी पार्टी ने राजीव गांधी को मिले भारत रत्न के खिलाफ दिल्ली विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया ।आम आदमी पार्टी अब राष्ट्रीय पार्टी है, ऐसे में कांग्रेस के कई नेताओं को लगता है कि केजरीवाल के प्रति नरम रुख मंहगा पड़ सकता है।

कांग्रेस–आप गठबंधन के पक्ष में कपिल सिब्बल

वरिष्ठ नेता और फिलहाल निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के अनुसार यदि दोनों पार्टियों का गठबंधन हो जाय तो दिल्ली की सातों सीटें जीती सकती है। हालांकि सिब्बल ने यह भी कहा कि यदि केजरीवाल दिल्ली के बाहर सीटें मांगते हैं तो पेंच फंस सकता है।

पूर्व के खटास आप और कांग्रेस की नजदीकियां को फिर से कर सकता है दूर।

यूपीए सरकार के खिलाफ आंदोलन कर पार्टी बनाने वाले अरविंद केजरीवाल की पहली सरकार बनाने में मदद कांग्रेस ने ही की थी और 2013 में दिल्ली में आदमी पार्टी की सरकार बनी थी। इसके बाद से दिल्ली में दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। आम आदमी पार्टी भी दिल्ली में अब तक लोकसभा सीट नहीं जीत पाई है। कांग्रेस नेतृत्व आम आदमी पार्टी से गठबंधन कर अगले लोकसभा चुनाव में खाता खुलवाना चाहता है, लेकिन दिल्ली के पार्टी नेताओं को लगता है इस गठबंधन से कहीं कांग्रेस का खाता हमेशा के लिए ही बंद ना हो जाए।

बहरहाल राजनीतिक मजबूरी के कारण कांग्रेस और केजरीवाल के साथ आने की संभावना बन रही है। फिलहाल दोनों पार्टियां गठबंधन को लेकर खामोश हैं और इसीलिए यह भी साफ नहीं है कि अगर भविष्य में गठबंधन होगा तो यह दिल्ली तक सीमित होगा या अन्य राज्यों को मिलाकर कोई बड़ा फार्मूला बनेगा! दिल्ली और पंजाब को मिलाकर लोकसभा की 20 सीटें हैं।आम आदमी पार्टी अपना विस्तार हरियाणा, गोवा, गुजरात तक कर चुकी है।अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है कि केजरीवाल कांग्रेस के लिए और कांग्रेस केजरीवाल के लिए कितनी कुर्बानी देने को तैयार होंगे।

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