राजस्थान में गहलोत और सचिन में रार जारी ,पीके की इंट्री से नयी राजनीति की सम्भावना बढ़ी 

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अखिलेश अखिल 

राजस्थान कांग्रेस में अभी भी सबकुछ ठीक नहीं है। सचिन और गहलोत के बीच चल रहे तनाव अभी भी बने हुए हैं। जयपुर स्थित कांग्रेस के वार रूम में सोमवार को गहलोत ,प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा और पार्टी के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा पहुंचे थे। वहाँ सचिन पायलट को  भी आना था। लेकिन सचिन नहीं आये। वे किसी और कार्यक्रम में चले गए थे। इस बैठक का मकसद सभी पार्टी विधायकों के साथ आपसी सहमति बनाने की थी जो सफल नहीं हुआ। सचिन तो   इस बैठक में शामिल नहीं हुए लेकिन दस जिलों के कांग्रेस विधायकों से फीड बैक लिया गया। जानकारी के मुताबिक़ यह बैठक सचिन के साथ आमने सामने बात करने की थी लेकिन वे नहीं रहे। सचिन अभी भी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना अभियान चला रहे हैं। पायलट शाहपुरा के परमानन्द धाम में एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि “एक सप्ताह हो गया है, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ मेरी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।”         
पायलट ने कहा, “मैं सम्मान के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी पहल जारी रखूंगा। मैं इसका राजनीतिक रूप से विरोध करता हूं, लेकिन सम्मान के साथ। मैं जो कहता हूं, उसके बारे में सावधान हूं।” रिपोर्ट में पायलट के हवाले से कहा गया है, “मैं सरकार का हिस्सा नहीं हूं। अगर हम बड़े लोगों के लिए कानून बदल सकते हैं, तो हमें सैनिकों के परिवारों के प्रति सहानुभूति हो सकती है। हमें नियमों में ढील देनी चाहिए और उन्हें उचित नौकरी देनी चाहिए।”          
अब जबकि राजस्थान में कांग्रेस नेता सचिन पायलट  के लिए कम से कम इस टर्म में सीएम का पद मिलना असंभव दिख रहा है। ऐसे में उनके अगले कदम को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। 
इसी बीच, ऐसी खबर आई कि प्रशांत किशोर की कंपनी आईपैक को सचिन पायलट की राजनीतिक रणनीति बनाने का जिम्मा मिला है। इस खबर के बाद वहां सस्पेंस और बढ़ गया है। यह भी कहा जा रहा है कि सचिन पायलट राज्य में तीसरा मोर्चा बनाने की संभावना टटोल सकते हैं। जिसमें आम आदमी पार्टी उन्हें समर्थन दे सकती है।
             बता दें कि जिस दिन सचिन पायलट अनशन पर बैठे थे, आम आदमी पार्टी सबसे पहले उनके समर्थन में आई थी। ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों की नजर सचिन पायलट के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई है। जानकारों का मानना है कि अगर सचिन पायलट तीसरा मोर्चा बनाते हैं तो राज्य में दोनों राष्ट्रीय दलों का समीकरण बिगड़ सकता है।

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