अडानी मामले में JPC की मांग का शरद पवार ने नहीं किया समर्थन, अब कांग्रेस ने दिया ये रिएक्शन

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बीरेंद्र कुमार झा

अडानी ग्रुप के मामले में जेपीसी जांच कराने की मांग का राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार ने समर्थन नहीं किया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट की बनाई गई कमेटी का स्वागत करते हुए कहा कि इसकी जांच हो रही है, ऐसे में ज्यादा उम्मीद है कि सच सामने आएगा। अदालत के फैसले के बाद जेपीसी जांच का कोई महत्व नहीं रह जाएगा

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार के इस बयान के बाद कांग्रेस ने बयान जारी किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह उनके (शरद पवार) अपने विचार हो सकते हैं। जयराम रमेश ने कहा कि”इस मामले में 19 विपक्षी दल एकजुट हैं। हम सभी इस पूरे मामले को बेहद गंभीर मानते हैं” साथ ही उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के खिलाफ एनसीपी सहित 20 विपक्षी दल एक साथ हैं।

क्या कहा था शरद पवार ने

एनसीपी के प्रमुख शरद पवार ने एक इंटरव्यू में अडानी समूह के मामले को लेकर कहा था कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को इतनी महत्ता क्यों दी जा रही है? हमने इनके बारे में कभी नहीं सुना, इनका बैकग्राउंड क्या है।जब हम ऐसे मुद्दे उठाते हैं जो पूरे देश में हंगामा मचाते हैं तो इसकी कीमत देश की अर्थव्यवस्था को चुकानी पड़ती है, हम इन चीजों की अवहेलना नहीं कर सकते।ऐसा लगता है कि टारगेट किया जा रहा है।

जेपीसी से सच नहीं आएगा सामने

शरद पवार ने कहा कि जेपीसी पूर्व में कई मुद्दों को लेकर बनाई गई। मुझे याद है कि जेपीसी एक बार कोका कोला के मामले पर बनाई गई थी जिसका मैं चेयरमैन था।ऐसा नहीं है कि पहले जेपीसी नहीं बनाई गई। जेपीसी की मांग गलत नहीं है, लेकिन मांग क्यों की गई? जेपीसी की मांग यह कहने के लिए की गई कि किसी औद्योगिक घराने की जांच होनी चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि अडानी समूह के मामले में जेपीसी बनती है तो इसमें मॉनिटरिंग सरकार करेगी तो ऐसे में सच कैसै सामने आएगा?

गौरतलब है की संसद में विपक्षी दल एक साथ होकर अडानी ग्रुप के मामले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रही थी,और इसकी जांच के लिए जे पी सी की मांग पर अड़ी थी।इसको लेकर संसद के पूरे बजट सत्र में जमकर हंगामा हुआ।दूसरी ओर बीजेपी राहुल गांधी के लंदन में दिए गए उनके बयान को लेकर कांग्रेस पर हमलावर थी।नतीजा राजनीतिक दलों की आपसी हठधर्मिता से जनता के लिए नीतियां बनाने की जगह सदन में सिर्फ और सिर्फ हंगामा हुआ।

 

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