हम में से ज्यादातर लोग अपनी कार की सर्विस समय पर करवा लेते हैं, लेकिन दिल की सेहत पर ध्यान तब जाता है, जब कोई परेशानी सामने आती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई कामकाजी लोग सुबह से शाम तक कंप्यूटर के सामने बैठे रहते हैं, तनाव झेलते हैं और नींद से भी समझौता करते हैं।यही वजह है कि अब हार्ट डिजीज सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है।
यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के सीनियर कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजशेखर का कहना है कि कई कामकाजी लोगों के शरीर में हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल या प्रीडायबिटीज जैसी समस्याएं मौजूद होती हैं, लेकिन इन्हें इसका पता तक नहीं होता। ऐसे में सिर्फ 10 मिनट निकालकर अपने जोखिम कारकों का आकलन करना दिल की सेहत के लिए पहला महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
डॉक्टर का कहना है कि हर कामकाजी व्यक्ति को समय-समय पर खुद से कुछ सवाल पूछने चाहिए.
1. क्या पिछले एक साल में आपने ब्लड प्रेशर चेक कराया है?
2. क्या आपने हाल ही में फास्टिंग ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाया है?
3. क्या आप सप्ताह में कम से कम 150 मिनट शारीरिक गतिविधि या एक्सरसाइज करते हैं?
4. क्या आपको रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद मिलती है?
5. क्या परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट डिजीज हुई थी?
अगर इन सवालों के जवाब चिंता बढ़ाने वाले हैं, तो ये संकेत हो सकता है कि आपको अपनी जीवनशैली पर ध्यान देने की जरूरत है।
डॉ. राजशेखर बताते हैं कि दिल को स्वस्थ रखने के लिए हमेशा बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती। लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, हर घंटे 5 मिनट टहलना, मीठे स्नैक्स की जगह फल या नट्स खाना और रोज कुछ मिनट गहरी सांस लेने का अभ्यास करना भी लंबे समय में बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

