Bihar News: संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर पटना के ज्ञान भवन में आयोजित ‘समरसता संकल्प अभियान’ की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामाजिक समरसता, शिक्षा और तकनीकी विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि संत रविदास के समरसता, सेवा और मानवता के संदेश को बिहार के हर गांव तक पहुंचाया जाएगा, वहीं शिक्षा और उच्च तकनीकी संस्थानों के विस्तार के जरिए राज्य को देश के अग्रणी ज्ञान केंद्रों में शामिल करने का लक्ष्य है।
गांव-गांव पहुंचेगा संत रविदास का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास ने समाज को जोड़ने और समानता का संदेश दिया था, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है। सरकार उनकी जन्मभूमि की मिट्टी को जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक पहुंचाएगी। यदि कोई मठ, मंदिर, धार्मिक स्थल या परिवार इस पवित्र मिट्टी को प्राप्त करना चाहता है तो उसके लिए भी व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने कहा कि संत रविदास की शिक्षाएं सामाजिक भेदभाव मिटाकर सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देती हैं और सरकार उसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
हर जिले में खुलेगा सावित्रीबाई फुले आवासीय विद्यालय
मुख्यमंत्री ने शिक्षा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बताते हुए कहा कि राज्य के सभी जिलों में माता सावित्रीबाई फुले के नाम पर आवासीय विद्यालय और छात्रावास स्थापित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्ग की बेटियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि आर्थिक स्थिति किसी भी बच्चे की शिक्षा में बाधा न बने और हर विद्यार्थी को बेहतर अवसर मिलें।
15 अगस्त से ऑनलाइन शिक्षक सुविधा का लक्ष्य
सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा रहा है, जहां छात्र रात 11 बजे तक भी ऑनलाइन शिक्षकों से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे। इस व्यवस्था को 15 अगस्त से शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों को भी वही शैक्षणिक सुविधाएं मिलनी चाहिए जो बड़े निजी स्कूलों में उपलब्ध हैं।
भागलपुर में बनेगी AI और कंप्यूटर साइंस यूनिवर्सिटी
मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा को लेकर भी कई बड़े ऐलान किए। उन्होंने कहा कि भागलपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। यह संस्थान आधुनिक तकनीक, शोध और नवाचार के क्षेत्र में बिहार को नई पहचान दिलाने का काम करेगा।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनर्स्थापन की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। करीब 220 एकड़ भूमि उपलब्ध करा दी गई है और अगले एक वर्ष के भीतर इस परियोजना पर कार्य शुरू करने की तैयारी है।
दिनकर और जुब्बा साहनी के नाम पर भी नए विश्वविद्यालय
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर साहित्य विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। वहीं मुजफ्फरपुर में स्वतंत्रता सेनानी जुब्बा साहनी के नाम पर आर्किटेक्चर और सिविल इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय विकसित करने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है।
उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़े, यही लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अब तक 211 डिग्री कॉलेजों की स्थापना की है और उनमें शिक्षकों की कमी दूर करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। टीआरई-4 के तहत लगभग 32 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है, जबकि उच्च शिक्षा संस्थानों में करीब 9 हजार अतिरिक्त शिक्षकीय पद सृजित करने की दिशा में भी काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा मजबूत शैक्षणिक ढांचा तैयार करना है, जिससे बिहार के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।
‘सबका साथ, सबका विकास’ पर जोर
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सामाजिक समरसता, समान अवसर और शिक्षा को विकास का आधार बताते हुए कहा कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ना ही सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संत रविदास का संदेश आज भी समाज को जोड़ने और समानता स्थापित करने की प्रेरणा देता है तथा सरकार उसी भावना के साथ विकास की योजनाओं को आगे बढ़ा रही है।
कार्यक्रम के दौरान संत रविदास के जीवन और विचारों पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर राज्य सरकार के कई मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि, साधु-संत और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

