पटना: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के गांधी मैदान स्थित खादी मॉल का दौरा कर हथकरघा और हस्तशिल्प से जुड़े बुनकरों एवं कारीगरों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उनके द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों का अवलोकन किया, संवाद किया और राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से मिथिला पेंटिंग से जुड़े कलाकारों से बातचीत की और कहा कि बिहार की पारंपरिक लोक कला और हस्तशिल्प राज्य की सांस्कृतिक पहचान हैं। सरकार इन कलाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।
‘बुनकरों की मेहनत ने बिहार को दिलाई वैश्विक पहचान’
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि हथकरघा उद्योग से जुड़े बुनकरों और कारीगरों ने अपनी मेहनत और कौशल से बिहार की पारंपरिक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। आज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बिहार के हथकरघा उत्पादों और पारंपरिक कलाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि हथकरघा उद्योग से जुड़े कामगारों, बुनकरों और शिल्पकारों को सरकार हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी ताकि उनका रोजगार और कारोबार दोनों मजबूत हो सकें।
मुख्यमंत्री ने खुद खरीदे खादी उत्पाद
खादी मॉल के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं खादी उत्पादों की खरीदारी भी की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य स्वदेशी उत्पादों और खादी उद्योग को बढ़ावा देना है। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे अधिक से अधिक हथकरघा और खादी उत्पादों का उपयोग करें, ताकि स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को आर्थिक मजबूती मिल सके।
‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा नया बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाना केवल परंपरा को सहेजना नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका को मजबूत करना भी है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि त्योहारों, उपहारों और दैनिक उपयोग में भी खादी और हथकरघा उत्पादों को प्राथमिकता दें।
अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस अवसर पर बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी डॉ. विद्यानंद सिंह ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य के बुनकरों और कारीगरों के लिए उत्साहवर्धक माना जा रहा है। इससे पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों के प्रति लोगों का भरोसा भी मजबूत होने की उम्मीद है।

