Bihar News: बिहार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए फाइलेरिया (लिम्फेटिक फाइलेरिया/हाथीपांव) उन्मूलन अभियान में ऐतिहासिक सफलता दर्ज की है। राज्य के अररिया, किशनगंज, मधेपुरा और सुपौल जिले पहली बार ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (TAS-1) के सभी निर्धारित मानकों पर सफल रहे हैं। इस उपलब्धि के बाद ये जिले अब सामूहिक दवा वितरण (MDA) चरण से आगे बढ़कर निगरानी (Surveillance) चरण में प्रवेश करेंगे।
इस उपलब्धि को संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी सराहा है, जिसे बिहार की मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रभावी जनस्वास्थ्य अभियान की वैश्विक पहचान माना जा रहा है।
एक दिन में 1.35 करोड़ लोगों को खिलाई गई फाइलेरिया रोधी दवा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2026 के सामूहिक दवा सेवन (MDA) अभियान के दौरान राज्य का लक्ष्य एक करोड़ लोगों तक फाइलेरिया रोधी दवा पहुंचाने का था। लेकिन बिहार ने इस लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए 11 फरवरी 2026 को एक ही दिन में 1 करोड़ 35 लाख लोगों को दवा खिलाकर नया रिकॉर्ड बनाया। यह निर्धारित लक्ष्य से लगभग 35 प्रतिशत अधिक उपलब्धि रही।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया जनभागीदारी की जीत
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि यह सफलता केवल सरकारी योजना की उपलब्धि नहीं, बल्कि लाखों स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, चिकित्सकों, जिला प्रशासन, विकास सहयोगी संस्थाओं और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट (DOT) पद्धति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, जिसके तहत केवल दवाओं का वितरण ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी में लोगों को दवा का सेवन भी सुनिश्चित कराया गया। इससे अभियान की सफलता और दवा सेवन की दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
11 जिलों में संक्रमण दर 1 प्रतिशत से नीचे
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य के अररिया, अरवल, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, सुपौल, गया, कैमूर, नालंदा, जहानाबाद और पटना सहित 11 जिलों के कुल 89 इम्प्लीमेंटेशन यूनिट्स में फाइलेरिया संक्रमण की दर 1 प्रतिशत से कम दर्ज की गई है। इसे उन्मूलन अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

TAS-2 की ओर बढ़े दो जिले
हाल ही में चार जिलों के कुल 37 इम्प्लीमेंटेशन यूनिट्स में TAS-1 सर्वे किया गया, जिनमें से 35 यूनिट्स सभी मानकों पर सफल रहे।
- अररिया और मधेपुरा अब TAS-2 सर्वे के लिए चयनित हो चुके हैं।
- सुपौल के सभी इम्प्लीमेंटेशन यूनिट्स भी सफलतापूर्वक निगरानी चरण में प्रवेश कर चुके हैं।
- किशनगंज ने भी फाइलेरिया नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।
अब 25 जिलों में होगा Pre-TAS सर्वे
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जुलाई महीने में राज्य के 25 जिलों के 107 इम्प्लीमेंटेशन यूनिट्स में प्री-ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (Pre-TAS) कराया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक प्रखंड में निर्धारित स्थानों से रात के समय रक्त के नमूने एकत्र किए जाएंगे। इनकी जांच के आधार पर यह तय किया जाएगा कि संबंधित क्षेत्र में संक्रमण की दर 1 प्रतिशत से कम है या नहीं।
2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत के लक्ष्य में बिहार की अहम भूमिका
भारत सरकार ने वर्ष 2027 तक देश को लिम्फेटिक फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। बिहार की यह उपलब्धि न केवल राज्य के लिए गर्व का विषय है, बल्कि राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

