Bihar News: बिहार सरकार ने राज्य के स्थायी और संविदा कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वित्त विभाग ने कर्मचारियों के सैलरी पैकेज खातों से जुड़ी बैंकिंग सुविधाओं को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए देश के 9 प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ अपने समझौता ज्ञापनों (MoU) का अगले एक वर्ष के लिए नवीकरण कर दिया है।

इस फैसले से राज्य के लाखों कर्मचारियों को पहले की तरह विशेष बैंकिंग सुविधाओं और बीमा लाभों का लाभ मिलता रहेगा। सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों को बेहतर वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराना और वेतन खातों से जुड़ी सुविधाओं में किसी प्रकार की बाधा न आने देना है।
सचिव (व्यय) रचना पाटिल की मौजूदगी में हुआ समझौता

सोमवार को वित्त विभाग के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सचिव (व्यय) श्रीमती रचना पाटिल की अध्यक्षता में सभी संबंधित बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने नए समझौते पर हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम में विभिन्न बैंकों के महाप्रबंधक और आंचलिक प्रबंधक भी मौजूद रहे। यह समझौता तत्काल प्रभाव से अगले एक वर्ष के लिए लागू रहेगा।
कर्मचारियों को मिलती रहेंगी ये खास सुविधाएं

सरकार द्वारा जारी सैलरी पैकेज के तहत कर्मचारियों को कई विशेष बैंकिंग लाभ पहले की तरह मिलते रहेंगे, जिनमें शामिल हैं—
- जीरो बैलेंस (Zero Balance) सैलरी अकाउंट
- मुफ्त दुर्घटना बीमा (Accidental Insurance Cover)
- रियायती ब्याज दरों पर ऋण (Loan)
- ओवरड्राफ्ट जैसी विशेष बैंकिंग सुविधाएं
- अन्य प्रीमियम बैंकिंग सेवाएं
इन सुविधाओं का उद्देश्य कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा के साथ बेहतर बैंकिंग अनुभव उपलब्ध कराना है।
इन 9 बैंकों के साथ बढ़ाया गया समझौता

राज्य सरकार ने जिन बैंकों के साथ MoU का नवीकरण किया है, वे हैं—
- भारतीय स्टेट बैंक (SBI)
- पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
- बैंक ऑफ बड़ौदा
- बैंक ऑफ इंडिया
- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
- केनरा बैंक
- इंडियन बैंक
- यूको बैंक
राज्य के कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार इन बैंकों में अपना सैलरी अकाउंट संचालित कर सकते हैं।
बैंकों को दिए गए विशेष निर्देश

सचिव (व्यय) रचना पाटिल ने बैंक अधिकारियों से कहा कि कर्मचारियों को सैलरी पैकेज की सभी सुविधाएं पूरी पारदर्शिता और प्राथमिकता के साथ उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सभी बैंक अपनी शाखाओं को समय रहते आवश्यक निर्देश जारी करें, ताकि किसी कर्मचारी को तकनीकी कारणों या लेनदेन संबंधी किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े।
क्यों अहम है यह फैसला?
यह समझौता पहले 7 जुलाई 2025 को एक वर्ष के लिए किया गया था, जिसकी अवधि 6 जुलाई 2026 को समाप्त हो रही थी। अब सरकार ने इसे अगले एक वर्ष के लिए बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया है कि लाखों सरकारी कर्मचारियों को बैंकिंग सुविधाओं में किसी प्रकार की रुकावट न आए।

