Bihar News: बिहार में बढ़ते भूमि विवादों और लंबित मामलों के तेजी से निष्पादन को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार भूमि न्यायाधिकरण में सदस्यों की संख्या 4 से बढ़ाकर 7 कर दी है। इसके साथ ही न्यायाधिकरण में पांच नए न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति भी की गई है।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि सरकार भूमि विवादों के समयबद्ध समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और आम लोगों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
भूमि विवाद मामलों के तेजी से निपटारे पर फोकस
मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार भूमि न्यायाधिकरण अधिनियम 2009 के तहत यह फैसला लिया गया है। सदस्यों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी और लोगों को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार न्यायाधिकरण को और अधिक मजबूत और सक्षम बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
पांच नए न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति
राज्य सरकार की ओर से बिहार भूमि न्यायाधिकरण, पटना में पांच नए न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति की गई है। नियुक्त किए गए सदस्यों में शामिल हैं:
- सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, किशनगंज – मनोज कुमार
- सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पूर्णिया – किशोर प्रसाद
- पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता – कुमार नवीनम
- सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गया – रवीन्द्र पटवारी
- पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता – रविन्द्र राय
लोगों को मिलेगा त्वरित और प्रभावी न्याय
राजस्व विभाग के सचिव जय सिंह द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सरकार की स्वीकृति के बाद यह निर्णय लागू किया गया है।
मंत्री ने कहा कि न्यायाधिकरण की क्षमता बढ़ने से भूमि विवादों के मामलों का तेजी से निष्पादन होगा और आम नागरिकों को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी न्याय मिल सकेगा।
बिहार में जमीन विवाद कम करने की कोशिश
सरकार का मानना है कि भूमि विवादों के कारण बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित रहते हैं। ऐसे में न्यायाधिकरण को मजबूत बनाने से जमीन से जुड़े विवादों के समाधान की प्रक्रिया तेज होगी और लोगों को राहत मिलेगी।

