Bihar News: बिहार में किसानों के लिए बड़ी राहत की तैयारी शुरू हो चुकी है। मुख्य सचिव Pratyaya Amrit ने ‘उत्तर कोयल जलाशय परियोजना’ और ‘मंडई वीयर एवं नहर प्रणाली’ की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए साफ निर्देश दिया कि खरीफ मौसम से पहले हर हाल में काम पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर पानी मिलना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
North Koel Project: तेजी से बढ़ रहा काम, अधिग्रहण अंतिम चरण में
‘उत्तर कोयल जलाशय परियोजना’ पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। राइट मेन कैनाल (RMC) की भौतिक प्रगति 31% से ज्यादा हो चुकी है, जबकि कुल 77.69 किमी लंबाई वाले प्रोजेक्ट में 57% से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।Aurangabad और Gaya जिलों में भूमि अधिग्रहण अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जिससे प्रोजेक्ट के जल्द पूरा होने की उम्मीद बढ़ गई है।
Mandai Weir Project: एक हफ्ते में बढ़ी रफ्तार
‘मंडई वीयर एवं नहर प्रणाली’ में भी काम तेजी पकड़ चुका है। बाएं मुख्य नहर सिस्टम में 63.50% और कररूआ डिस्ट्रीब्यूटरी में 66% से ज्यादा काम पूरा हो गया है। पिछले एक सप्ताह में ही 2.40% की प्रगति दर्ज की गई, जो प्रोजेक्ट की स्पीड को दिखाता है।
खरीफ सीजन को लेकर अलर्ट, तुरंत बढ़ेंगे संसाधन
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए मैनपावर और मशीनों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि एक्सकेवेटर, टिपर और रोलर जैसे उपकरणों की कमी नहीं होनी चाहिए, ताकि काम की गति प्रभावित न हो।
भूमि अधिग्रहण और भुगतान में तेजी का आदेश
औरंगाबाद में बचे हुए रैयतों की जमीन की रजिस्ट्री इसी सप्ताह पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके साथ ही मंडई परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में जमीन हस्तांतरण और मुआवजा भुगतान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की बाधा दूर की जा सके।
गुणवत्ता के साथ स्पीड, हर हफ्ते होगी निगरानी
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि काम की गति बढ़ाने के साथ गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। वरीय अधिकारियों को साप्ताहिक आधार पर प्रगति की निगरानी करने और तकनीकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान निकालने का निर्देश दिया गया है।
किसानों के लिए गेमचेंजर साबित होंगी ये परियोजनाएं
इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हजारों किसानों को समय पर सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और सूखे की समस्या से भी राहत मिलेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होगा।

