नीतीश की हाथी चाल से एनडीए में खलबली,जेडीयू की डिमांड ने बढ़ाई बीजेपी की धड़कन

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बिहार की सियासी बिसात पर जेडीयू की हाथी चाल से एनडीए की राजनीति उबाल पर है। डिमांड भी ऐसा कि सबकुछ उथल-पुथल हो जाने के संकेत मिले हैं। सूत्रों की मानें तोजेडीयू का नया दावा भी बीजेपी नेतृत्व को हिला देने वाला है। अब तक सब कुछ मीठा-मीठा के बाद जेडीयू की डिमांड ने अब एनडीए की राजनीति में टकराहट के बीज बो डाले। जेडीयू विधानमंडल की बैठक में ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी नेतृत्व के बीच गहरा मंथन की शुरुआत हो गई। आखिर जेडीयू की डिमांड से बीजेपी से क्या कुछ छीनने वाला है?

यह खबर तो पहले भी थी कि जेडीयू नेतृत्व ने दो उपमुख्यमंत्री के साथ साथ कुछ और डिमांड भी की थी। पहले तो चल यह रहा था कि पूर्व से चले आ रहे विभागों की अदला-बदली होगी। बीजेपी को जेडीयू वाले और जेडीयू को बीजेपी वाले विभाग देने होंगे। मगर, इस डिमांड का तो पटाक्षेप हो गया। इस अनसुनी डिमांड के बाद जेडीयू की तरफ से ज्यादा मंत्रियों की डिमांड आ गई है। यह मांग जेडीयू विधायक दल की बैठक में और वह भी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की मौजूदगी में आया।गौरत्व इसी 20 अप्रैल को पटना में आयोजित JDU की मीटिंग के बाद इस बात का खुलासा हुआ। वो भी पूर्व मंत्री और नीतीश कुमार के करीबी नेता श्रवण कुमार के बयान के बाद।
बिहार सरकार में मंत्री रहे श्रवण कुमार ने कैबिनेट विस्तार को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि पिछली बार की तुलना में इस बार की सरकार में जेडीयू कोटे से अधिक मंत्री बनाए जाएंगे। यह मांग जेडीयू आश्वासन भी नीतीश कुमार की तरफ से मिला। बीजेपी के भीतर सवाल संख्या के साथ-साथ विभाग का भी है। अब पता नहीं किस विभाग पर जेडीयू की नजर है। इस बात के खुलासे के बाद एक नए विवाद के जन्म लेने के आसार है।

जनता दल (यू) की नजर विधानसभा अध्यक्ष पद की कुर्सी पर भी है। इस पद के बहाने राजनीतिक मजबूती के साथ जेडीयू आगे की रणनीति को अंजाम देना चाहती है। फिलहाल बीजेपी ने प्रेम कुमार को विधानसभा अध्यक्ष बना कर जातीय संतुलन की नींव रखी है।
जेडीयू पार्टी अब रक्षात्मक के बजाय आक्रामक रुख अपनाकर अपनी मांगों को मनवाने का प्रयास करेगी
बिहार विधानसभा अध्यक्ष पद को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश।
33 संभावित मंत्रियों की सूची में जेडीयू अपना पलड़ा भारी रखना चाहती है।

प्रेम कुमार अति पिछड़ी जाति से आते हैं। ये अतिपिछड़ा वोट बीजेपी का टारगेट वोट है। ऐसे में प्रेम कुमार का एडजस्टमेंट बीजेपी नेतृत्व के सामने एक बड़ी समस्या बन कर आ सकती है। वे अनुभवी, वरिष्ठ और बीजेपी के आधार बनाने वाले नेता हैं। इनका एडजेस्टमेंट जातीय तुष्टिकरण के प्लेटफॉर्म पर एक नई समस्या बन कर आया है।

जेडीयू विधायक दल की बैठक के बाद बीजेपी रणनीतिकारों के बीच एक अनजाना भय घर कर गया है। वह भी इसलिए कि सोमवार के विधायक दल की बैठक से जो बातें राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रही है, उस मीटिंग में नीतीश कुमार भी मौजूद थे। ऐसे में नीतीश कुमार इस डिमांड के प्रति गंभीर हुए तो बीजेपी को ज्यादा विभाग और विधानसभा अध्यक्ष का पद जेडीयू को देना होगा।

बीजेपी के रणनीतिकारों ने देख लिया है कि सीएम के नाम पर नीतीश कुमार ने जिस पर उंगली रख दी, उसी के समर्थन में जेडीयू के 85 विधायक तो छोड़िए बीजेपी के 89 विधायकों ने भी सम्राट चौधरी को अपनी पसंद बना लिया। ऐसे में नीतीश कुमार की जिद्द में विधानसभा अध्यक्ष का पद या कुछ और विभाग आया तो बीजेपी के सामने एक नई फजीहत आ खड़ी होगी।

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