Bihar News: पटना में आयोजित एक अहम समीक्षा बैठक में बिहार सरकार के युवा, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री संजय सिंह (टाइगर) ने साफ कहा कि प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण बेहद जरूरी है।
नियोजन भवन स्थित प्रतिबिंब सभागार में हुई इस बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई और अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए गए।
आईटीआई, रोजगार मेला और ट्रेनिंग सिस्टम पर सख्त नजर
बैठक में राजकीय आईटीआई, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, रोजगार मेले, विशेष नियोजन मेले, करियर सूचना केंद्र, स्टडी किट और टूल किट वितरण जैसी योजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि केवल प्रशिक्षण देना काफी नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जाए। इसके लिए ट्रेनिंग और जॉब के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
‘सर्टिफिकेट नहीं, नौकरी चाहिए’—मंत्री का स्पष्ट संदेश
मंत्री संजय सिंह ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि कौशल विकास का उद्देश्य केवल प्रमाण पत्र बांटना नहीं होना चाहिए, बल्कि युवाओं को रोजगार योग्य बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने बिहार कौशल विकास मिशन के तहत चल रहे ट्रेनिंग सेंटरों की गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और उपस्थिति की भी समीक्षा की और आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।
1 करोड़ रोजगार लक्ष्य पर सरकार की बड़ी तैयारी
राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी 1 करोड़ रोजगार लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने सभी जिलों में नियमित रोजगार मेले आयोजित करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी मिलने के बाद भी युवाओं की मॉनिटरिंग की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें वास्तविक रोजगार मिला है और वे लंबे समय तक उसमें टिके रहें।
लापरवाही पर सख्ती, खराब केंद्रों पर होगी कार्रवाई
मंत्री ने कुशल युवा कार्यक्रम केंद्रों के नियमित निरीक्षण का आदेश देते हुए कहा कि जो केंद्र मानकों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कॉलेजों में योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया, ताकि अधिक से अधिक छात्र इनसे जुड़ सकें और लाभ उठा सकें।
आईटीआई में खाली सीटें भरने के लिए विशेष अभियान
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की समीक्षा के दौरान मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी संस्थानों का संचालन व्यवस्थित तरीके से हो। खाली सीटों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाने और छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। उन्होंने साफ कहा कि गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

