दिल्ली में जलसंकट को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची केजरीवाल सरकार,याचिका दाखिल

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दिल्ली में गहराते जल संकट को लेकर राज्य की केजरीवाल सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।इस संबंध में दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है।सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए इस याचिका में दिल्ली सरकार ने यह मांग की है कि दिल्ली को हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराया जाए।दिल्ली को अतिरिक्त पानी देने की मांग वाली इस याचिका के पक्ष में दिल्ली सरकार का यह तर्क है कि दिल्ली मे  समय इस पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से यहां पानी की खपत काफी बढ़ गई है।दिल्लीवासियों की पानी की इस जरूरत को देखते हुए राजधानीवासियों की इस जरूरत को पूरा करना हम सभी की जिम्मेदारी बनती है।

आतिशी ने हरियाणा सरकार को ठहराया जिम्मेदार

दिल्ली सरकार ने शीर्ष न्यायालय से यह आग्रह किया है कि वह हरियाणा सरकार को यह निर्देश दे कि दिल्ली में पानी की मांग को देखते हुए एक महीने के लिए अतिरिक्त पानी छोड़े ताकि दिल्लीवासियों को पानी की कमी को लेकर कोई कष्ट नही हो। इसके पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार से यह आग्रह किया था कि वे दिल्ली में जलसंकट को देखते हुए एक महीने के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराएं।वहीं दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने गुरुवार को इस आशय का बयान दिया था कि दिल्ली में गहराते जलसंकट बने रहने की वजह हरियाणा सरकार द्वारा दिल्लीवासियों के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं छोड़ना है।

क्या है मामला

दिल्ली के पास अपना कोई जलस्रोत नहीं है।अपना जलश्रोत न होने की वजह से प्रदेश को पानी के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है।दिल्ली और हरियाणा के बीच यमुना नदी के जल को लेकर हमेशा से विवाद होता रहता है। इस विवाद में दिल्ली और हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश भी शामिल हैं। 1954 में यमुना जल समझौता हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच हुआ था,जिसमें हरियाणा को यमुना के जल का 77 प्रतिशत हिस्सा और उत्तर प्रदेश को 23 प्रतिशत हिस्सा तय किया गया था,लेकिन उस समय तीन राज्यों का जिक्र नहीं किया गया था।बाद में दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश ने भी यमुना के जल को लेकर अपना दावा ठोका जिससे विवाद गहराया गया। उसके बाद 1993 में दिल्ली और हरियाणा के बीच जल समझौता हुआ, जिसमें दिल्ली को पानी देने पर सहमति बनी। फिर 1994 में पांच राज्यों के बीच यमुना के जल को लेकर समझौता हुआ, जिसके अनुसार सभी राज्यों को उनके हिस्सा का पानी दिया जाता है,लेकिन इस समझौते में दिल्ली को सबसे अधिक फायदा होता है।इस समझौते में यह व्यवस्था दी गई है कि दिल्ली को जब भी पानी की जरूरत होगी,इन राज्यों को उसे पानी देना होगा।

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