बीजेपी कुछ मुद्दों को अपने तीसरे कार्यकाल में पूरा करने की बात चुनावी सभाओं में कर रही। दरअसल बीजेपी ऐसा इसलिए कर रही है ताकि इससे प्रभावित होकर मतदाताओं का ध्रुवीकरण इसके पक्ष में हो जाय और यह लोकसभा चुनाव 2024 की चुनावी वैतरणी आसानी से पार कर तीसरी बार सत्ता में आ जाय। बीजेपी के ऐसे ही मुद्दों में से एक मुद्दा हैं यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) यानि समान नागरिक संहिता का मुद्दा।लोकसभा चुनाव 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर से यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) यानी समान नागरिक संहिता को लेकर बड़ी बात कही है।उन्होंने कहा है कि केंद्र में लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने पर बीजेपी पूरे देश में इस कानून को लागू करेगी। उनका कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में व्यक्तिगत कानून नहीं हैं
क्या देश को शरिया से चलाया जाना चाहिए
एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में अमित शाह ने सवालिया लहजे में कहा कि क्या देश को शरिया के आधार पर, पर्सनल लॉ के आधार पर चलाया जाना चाहिए? उन्होंने कहा कि कोई भी देश कभी भी इस तरह से नहीं चला है।किसी भी लोकतांत्रिक देश में कोई पर्सनल लॉ नहीं चलता है और जब दुनिया में ऐसा नहीं हो रहा है तो फिर सिर्फ भारत में ऐसा क्यों हो?
बीजेपी के संकल्प पत्र में भी है यूसीसी का वादा
गृह मंत्री अमित शाह ने तर्क देते हुए कहा कि दुनिया में कई ऐसे मुस्लिम देश हैं, जहां शरिया कानून का पालन भी नहीं किया जाता है।समय आगे बढ़ गया है। अब भारत को भी आगे बढ़ने की जरूरत है।गौरतलब है के कि देश में समान नागरिक संहिता लागू करना बीजेपी की ओर से लोकसभा चुनाव के लिए जारी किए अपने घोषणा पत्र (संकल्प पत्र) में किए गए प्रमुख वादों में से एक है।
संविधान सभा ने भी किया था यूसीसी का वादा’
अमित शाह ने आगे कहा कि सभी लोकतांत्रिक देशों में समान नागरिक संहिता है और अब समय आ गया है कि भारत भी ऐसा करे। उन्होंने यह भी कहा कि जब संविधान का मसौदा तैयार किया जा रहा था, तब यूसीसी संविधान सभा की ओर से देश से किया गया एक वादा था।
कांग्रेस वोट बैंक के चक्कर में कर रही इसका विरोध
गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता की आलोचना के लिए कांग्रेस पर भी हमला किया।उन्होंने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में क्या सभी के लिए एक कानून नहीं होना चाहिए? यह धर्मनिरपेक्षता का सबसे बड़ा संकेत है।कांग्रेस इससे डरती नहीं है बल्कि वह तो इसमें लिप्त ही है।कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के कारण संविधान सभा की ओर से किए गए वादे को पूरा करने में विफल रही है।
उत्तराखंड में लागू हो चुका है यह कानून
अमित शाह ने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद इस कानून पर सामाजिक, न्यायिक और संसदीय दृष्टिकोण से बहस होगी। आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बन चुका है।

