गणतंत्र दिवस पर नारी शक्ति ने कर्तव्य पथ पर शौर्य और साहस का किया अदभुत प्रदर्शन

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हमारा देश भारत आज 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मक्रों के साथ बग्घी पर सवार होकर कर्तव्य पथ स्थित समारोह स्थल पर आई। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा झंडोत्तोलन के बाद कर्तव्य पथ पर परेड और झांकियों का प्रदर्शन हुआ।आज कर्तव्य पथ पर हुआ परेड मुख्य रूप से महिलाओं पर केंद्रित था, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा निभाई गई भूमिकाओं को दर्शाया गया।पहली बार परेड की शुरुआत 100 महिला कलाकारों ने भारतीय संगीत वाद्य यंत्र बजाते हुए किया।इस बार की परेड की शुरुआत महिला कलाकारों द्वारा बजाए गए शंख, नादस्वरम, नगाड़ा आदि वाद्य यंत्रों के संगीत के साथ हुई।इस अवसर पर देश की होनहार बेटियों ने मोटरसाइकिल पर भी कई दुशासिक कार्य करते हुए अपने शौर्य और साहस का अद्भुत प्रदर्शन किया।

अपने प्रदर्शन से पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ा

कर्तव्य पथ पर रोमांचक प्रदर्शनों की श्रृंखला में सीआरपीएफ, एसएसबी और बीएसएफ की सैनिक बेटियों ने मोटरसाइकिल पर जबरदस्त कारनामे किए। ऐसे कारनामे जो अबतक तक सिर्फ पुरुष ही करते आ रहे थे,उसे इस बार महिलाओं ने करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इन महिला सैनिकों ने अपने मोटरसाइकिल पर बेहद कठिन कर्तव्यों को पूरी शिद्धता के साथ कुछ ही मिनट में कर दिखाया।

केंद्रीय सशस्त्र बल के कारनामे

केंद्रीय सशस्त्र बल की महिलाकर्मियों ने कर्तव्य पथ पर नारीशक्ति की शक्ति का प्रदर्शन किया है।मोटरसाइकिलों पर 265 महिला बाईकर्स ने भारतीय महिलाओं की बहादुरी, वीरता और दृढ़ता के संकल्प को दिखाया जो देश भर में सर्वत्र सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैनात हैं।

योग से लेकर चंद्रलोक तक के थीम पर आधारित परेड किया मोटरसाइकिल पर

सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएफ और विभिन्न सैन्य संगठनों की महिलाकर्मियों ने घने कोहरे के बीच अपने साहस और शौर्य भरे कारनामे को मोटरसाइकिल पर अंजाम दिया। इनके अदम्य साहस और शौर्य से भरे कार्यक्रमों में मोटरसाइकिल पर योग का प्रयोग करने से लेकर चंद्रयान को चंद्रलोक पर भेजने जैसे कारनामे को इतने बेहतरीन ढंग से अंजाम दिया कि दर्शक इसे देख कर मंत् मुग्ध हो जाते थे। वे अपलक इनके कारनामों को तबतक निहारते रहते, जबतक कि एक टुकड़ियां अपना प्रदर्शन कर इनकी आंखों से ओझल न हो जाती,और उसकी जगह दूसरी टुकड़ी इनके सामने नहीं आ जाती थी।

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