कांग्रेस की चालाकी पर भारी पड़े अखिलेश नीतीश और ममता

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बीरेंद्र कुमार झा

विपक्षी राजनीतिक दलों ने कई महीने पहले जोर-जोर से एक गठबंधन बनाया था और उसका नाम इंडिया गठबंधन रखा गया था। इस गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर कांग्रेस के कंधों पर यह जिम्मेदारी थी कि वह सब को साथ लेकर चले और सीट बंटवारे की बात करें।बेंगलुरु, मुंबई और पटना की बैठकों में इसे लेकर विपक्षी दलों ने मांग भी उठाई थी। कश्मीर से केरल तक के दल इन मीटिंगों का हिस्सा थे और माहौल भी बना था लेकिन कांग्रेस ने सीट बंटवारों की मांग को टाल दिया था। तब कहा जा रहा था कि कांग्रेस अपनी बारगेनिंग पावर बढ़ाना चाहती है। शायद उसे लगता था कि राजस्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उसे सत्ता मिली तो माहौल उसके पक्ष में होगा।

चुनाव जीतती तो कांग्रेस के अलग होते तेवर

चुनाव जीतने की स्थिति में कांग्रेस सहयोगी दलों से सीट बंटवारे में मजबूती से बात रख सकती। यही वजह थी कि वह सीट बंटवारे की मांगों को लगातार टालते जा रही थी। अब शायद कांग्रेस को इसका यही दांव भारी पड़ रहा है और तीन राज्यों में इसकी हुई करारी हार के बाद यूपी में अखिलेश यादव, बिहार में नीतीश कुमार और बंगाल में ममता बनर्जी इसका फायदा उठाने में जुट गए हैं। तीनों नेताओं ने 6 दिसंबर को कांग्रेस द्वारा बुलाई गई मीटिंग में आने से ही इनकार कर दिया। तीनों दल अपने छोटे नेताओं को भेजने की बात कर रहे थे।इससे दबाव में आई कांग्रेस ने अब मीटिंग को ही स्थगित करने का फैसला लिया है।

सीट बटवारे में अब कांग्रेस पर क्षेत्रीय दलों को वरीयता देने का दबाव

माना जा रहा है कि अखिलेश,ममता और नीतीश इन तीनों नेताओं ने मीटिंग में न जाने की बात इसलिए कही, थी ताकि कांग्रेस पर उसका ही दांव आजमाया जा सके। अखिलेश यादव तो पहले से ही करते रहे हैं कि जो दल जहां मजबूत है, वही अपने राज्यों में सीटों के बंटवारे पर फैसला लेगा।इसके अलावा ममता बनर्जी ने सबसे पहले इस संबंध में कांग्रेस को नसीहत देते हुए कहा था की कि उसे त्याग करना चाहिए। क्षेत्रीय दल जहां मजबूत है वहां उन्हें अधिक सीटें मिलनी चाहिए। अब तो नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू भी कांग्रेस को दबाव में लेने के मूड में आ गई है।

संयोजक बनने की उम्मीद में नीतीश कुमार भी बढ़ाने लगे कांग्रेस पर दबाव

दरअसल जब तीन मीटिंग हुई तो नीतीश कुमार उसमें खुद को संयोजक घोषित करवाना चाहते थे। ऐसी चर्चाएं थी। लेकिन अंत में इंडिया गठबंधन में कई संयोजक बना दिए गए । इससे नीतीश कुमार को बड़ा झटका लगा था और अब जब कांग्रेस को तीन राज्यों में चुनावी हार मिली है और वह बैक फुट पर आ गई है तो नीतीश कुमार उसे भुनाने बनाने में जुटे गए हैं। जदयू नेता विजय चौधरी ने तो सोमवार को ही कह दिया था कि इंडिया गठबंधन को संयोजक के पद के लिए एक विश्वसनीय चेहरे की जरूरत है और वह चेहरा नीतीश कुमार हो सकते हैं।

 

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