विकास कुमार
बीजेपी नेता पंकजा मुंडे की वैद्यनाथ सहकारी साखर कारखाना पर कार्रवाई के बाद उनकी रणनीति बदल गई है। पंकजा मुंडे ने अब बीजेपी आलाकमान को अपने तेवर दिखाने शुरु कर दिए हैं। पंकजा मुंडे ने कहा कि विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं देना किसी भी दल के लिए अच्छा निर्णय नहीं होगा। पंकजा मुंडे ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मेरी पार्टी मुझे क्यों चुनाव में नहीं उतारेगी,मुझे जैसे उम्मीदवार को चुनाव में टिकट नहीं देना किसी भी पार्टी के लिए कोई अच्छा निर्णय नहीं होगा,यदि वे ऐसा निर्णय लेते हैं तो उन्हें लोगों के प्रश्नों का उत्तर देना होगा।
पंकजा मुंडे को 2019 में उनके चचेरे भाई और एनसीपी नेता धनंजय मुंडे ने पार्ली विधानसभा सीट पर हरा दिया था। पंकजा ने यह भी कहा कि वह नया निर्वाचन क्षेत्र नहीं खोज रही हैं। उन्होंने अपनी बहन लोकसभा सदस्य प्रीतम मुंडे की जगह लेने की संभावनाओं को भी खारिज कर दिया। दरअसल धनंजय मुंडे अब एनसीपी के अजित पवार गुट के साथ हैं। धनंजय मुंडे अभी शिवसेना-बीजेपी-एनसीपी सरकार में राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। धनंजय मुंडे बीजेपी गठबंधन के पार्ली विधानसभा से उम्मीदवार हो सकते हैं,और ऐसे में पंकजा मुंडे की उम्मीदवारी पर खतरा मंडराने लगा है।
एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने भी पंकजा मुंडे पर सहानुभूतिपूर्ण टिप्पणी की है। इस पर पंकजा मुंडे ने कहा कि शायद वह अब भी उसी दौर से गुजर रही हैं,जिससे वे करीब 10-12 साल पहले गुजरी थी। वहीं पंकजा मुंडे ने पुष्टि की है कि उनके परिवार द्वारा नियंत्रित एक सहकारी चीनी मिल को जीएसटी विभाग से नोटिस मिला है। अब देखने वाली बात होगी कि महाराष्ट्र की राजनीति में पंकजा मुंडे का अगला कदम क्या होगा।

