बीरेंद्र कुमार झा
मुरादाबाद दंगों की रिपोर्ट 40 साल बाद मंगलवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश हो गई। 1980 ईस्वी में ईद के नमाज के दौरान उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद में दंगा भड़का था। इसमें 83 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। रिपोर्ट में बताया गया है की दंगे के लिए ना तो हिंदू जिम्मेदार थे और ना ही आम मुसलमान दोषी थे।संघ या किसी हिंदूवादी संगठन को भी इसके लिए दोषी नहीं ठहराया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुस्लिम लीग के दो नेताओं के कारण यह दंगा हुआ था।अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए इन लोगों ने सुनियोजित साजिश के तहत दंगा कराया था। आयोग ने दंगा रोकने के लिए कई सुझाव दिए हैं। खास तौर पर यह कहा गया है कि मुसलमानों को वोट बैंक समझने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।
13 अगस्त 1980 को मुरादाबाद में हुआ था बड़ा दंगा
मुरादाबाद में 13 अगस्त 1980 की सुबह ईद की नमाज के दौरान दंगे भड़क गए थे। इसमें 83 लोग मारे गए थे और 112 लोग घायल हुए थे।उस वक्त 70 हजार नमाजी ईद उल फितर की नमाज पढ़ने ईदगाह पहुंचे थे ।ईदगाह के पास कुछ सूअरों की आने के बाद विरोध शुरू हुआ था और पुलिस अधिकारियों पर हमले शुरू कर दिए गए थे। हिंदुओं के मकानों पर भी पथराव हुए थे। इस के बाद पुलिस ने पहले लाठी, फिर आंसू गैस, और फिर गोलियां चलाई।इस्केबाद हिंदू भी भड़क गए थे,और दंगे ने खौफनाक रूप धारण कर दिया। था।
बीपी सिंह सरकार ने बिठाए थे जांच आयोग
तत्कालीन बी पी सिंह की सरकार ने दंगे की जांच के लिए न्यायमूर्ति एमपी सक्सेना को जिम्मेदारी सौंपते हुए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग की समिति बनाई थी।न्यायमूर्ति एमपी सक्सेना ने 496 पेज की रिपोर्ट 29 नवंबर 1983 को सरकार को सौंपी थी। तब से यह रिपोर्ट दबी हुई थी।
49 साल में 14 बार अटकने के बाद योगी राज में सदन में पेश हुआ दंगा वाला यह रिपोर्ट
दंगे से संबंधित रिपोर्ट सदन में पेश की गई ।कई बार इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा गया था। लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। पिछले 40 साल में 14 बार किसी ने किसी कारण से यह फाइल दवा दी गई। अब मुख्यमंत्री योगी ने रिपोर्ट और इससे संबंधित पत्रावली निकलवाई और कैबिनेट से मंजूरी के बाद विधानसभा में पेश किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुरादाबाद दंगों में पुलिस,हिंदुओं और मुसलमानों का कोई हाथ नहीं था। इसमें संघ और बीजेपी भी नहीं थी। यह पूर्व नियोजित दंगा था। मुस्लिम लीग व कुछ संगठन इसके लिए जिम्मेदार थे।इसमें यह भी कहा गया है कि मुस्लिम लीग के दो नेताओं के राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते यह दंगा हुआ था। मुस्लिम समुदाय में नेताओं को लेकर चल रही खींचतान के चलते दंगा हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार ईदगाह और अन्य स्थानों पर गड़बड़ी पैदा करने के लिए कोई भी सरकारी अधिकारी ,कर्मचारी या हिंदू जिम्मेदार नहीं था।
दंगा मुस्लिम लीग के दो नेताओं के मनबढ़े होने के कारण
दंगों के इस रिपोर्ट में में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भारतीय जनता पार्टी का जिक्र कहीं भी सामने नहीं आई है। आम मुसलमानो को भी ईदगाह पर उपद्रव करने के लिए उत्तरदाई नहीं ठहराया गया है।इस रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्टर समीम अहमद के नेतृत्व वाली मुस्लिम लीग और डॉक्टर हामिद हुसैन उर्फ डॉक्टर अज्जी से के नेतृत्व वाले खाकसार और उनके समर्थकों और भाड़े के व्यक्तियों ने दंगा किया और कराया था।
यह दंगा पूर्व नियोजित तथा केवल उन दोनों मुस्लिम नेताओं के लोगों के दिमाग की उपज थी।नमाजियों के बीच में सूअर धकेल दिए गए।अफवाह फैलने के बाद मुसलमानों ने थाने पुलिस चौकी और हिंदुओं पर हमला किया था। तब हिंदुओं ने भी बदला लिया। इसके बाद दंगा भड़क गया था। भगदड़ में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अधिक संख्या में मारे गए थे।

