अखिलेश अखिल
पिछले दिनों भोपाल में पीएम मोदी ने चुनावी अजेंडा को सेट कर दिया। पीएम मोदी गए थे बंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने और फिर बीजेपी के लोगों को संबोधित करते हुए विपक्ष पर हमलावर हो गए। सबको भ्रष्ट बताया और सबके घोटाले की सूची भी जारी कर गए। यह पीएम मोदी का पहला बड़ा हमला था। बात आगे बढ़ी तो पसमांदा को लेकर राजनीति की। पसमांदा के पिछड़ेपन की चर्चा की। मकसद यही था कि मुसलमानो का यह वर्ग बीजेपी के साथ जुड़े। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि मुसलमानो का एक वर्ग ही सरकारी योजनाओं का लाभ उठता रहा है। पसमांदा आज भी पिछड़े हैं। फिर पीएम मोदी ने सामान नागरिक संहिता की बात की और इसे सबके लिए जरुरी बताया। इसके फेवर में बाहत से तर्क भी दिए। पीएम मोदी भोपाल में बोल रहे थे और दिल्ली की सियासी पारा चढ़ता जा रहा था। की दलों ने इसपर अपनी बात भी कही और बीजेपी के खेल पर हमला भी किया।
इस घटना के दो दिन बात ही अमित शाह बिहार पहुँच गए। लखीसराय गए और पहले नीतीश कुमार पर हमला करते हुए उन्हें उन्हें पलटू बाबू कह गए। उनपर कई आरोप लगाए और मुंगेर की जनता से कहा कि अगले चुनाव में इन सबको सबक सिखाने की जरूरत है। अमित शाह ने पैतरा बदलते हुए राहुल गाँधी पर भी तंज कैसा और राजद को भी आड़े हाथो लिया। राहुल के बारे में अमित शाह ने कहा कि पिछले 20 साल से राहुल को कांग्रेस लांच कर रही है। इस बार फिर पटना से उन्हें लांच किया गया है। सभी भ्रष्टाचारी मिलकर यह काम कर रहे हैं।
अमित शाह ने 27 मिनट के अपने भाषण में 8 बार नीतीश कुमार का नाम लिया। शाह ने नीतीश कुमार को पलटूराम बताया और कहा कि जिस शख्स ने इंदिरा गांधी और लालू यादव के खिलाफ राजनीति की आज वे फिर से कांग्रेस और आरजेडी के पास चले गए हैं। शाह ने कहा कि नीतीश प्रधानमंत्री नहीं बन रहे हैं बल्कि लालू यादव को मूर्ख बना रहे हैं। नीतीश मुख्यमंत्री ही बने रहना चाहते हैं। 10 महीने में पांचवें बिहार दौरे पर आए अमित शाह ने नरेंद्र मोदी सरकार के देश और बिहार में नौ साल के बड़े काम गिनाए। दूसरी तरफ जदयू ने भी शाह से 12 सवाल पूछ कर निशाना साधने की कोशिश की जिसमें एक अहम सवाल ये था कि पटना विश्वविद्यालय को सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा कब दिया जाएगा।
कहने को अमित शाह की यह रैली भाजपा सरकार के 9 साल पूरे होने के अवसर पर केंद्र सरकार के कार्यों का प्रचार करने को ले कर थी, लेकिन इस रैली का तेवर यही बता रहा था कि 2024 लोकसभा चुनाव की जंग कैसे लड़ी जाएगी। नीतीश कुमार से ले कर राहुल गांधी तक को जिस तरह से अमित शाह ने निशाने पर लिया वह बताता है कि पटना में आयोजित महाविपक्ष के जुटान से भाजपा को अब अपनी रणनीति पर काफी गंभीरता से सोचने और काम करने की जरूरत हो गयी है। 40 में से 39 सीटें मिलना आसां नहीं होता। यही वो संख्या है जिसकी वजह से भाजपा ने आराम से 300 का आंकड़ा पार कर लिया था। यह आंकड़ा बरकरार रहे इसी के फ़िराक में बीजेपी लगी हुई है। लेकिन क्या अब यह इतना आसान है ?

