अब विपक्षी एकता के खिलाफ बीजेपी के बड़े नेता उतरे मैदान में 

0
183


अखिलेश अखिल 

बीजेपी जान गई है कि अगला चुनाव को साधारण चुनाव नहीं है। यही वह चुनाव में जहां से विपक्षी ताकत से मुकाबला करना है। बीजेपी इसकी काट भी ढूंढ रही है लेकिन सबसे ज्यादा अपने बड़े नेताओं के जरिये विपक्षी एकता के अंतर्विरोधों पर हमका भी कर रही है। बीजेपी चाहती है कि किसी भातरः से विपक्ष एक मंच पर नहीं पहुंचे। उसे पता है कि अब तक उसे 37 फीसदी वोट ही मिलते रहे हैं बाकी 63 फीसदी वोट विपक्ष में बंटते  रहे हैं। बीजेपी को इसी का लाभ मिलता रहा है। लेकिन बदली परिस्थिति का सामना भी करना है। बीजेपी कई राज्यों में नए साथियों की तलाश भी कर रही है और एनडीए को फिर से जागृत भी करने को तैयार है लेकिन एक रणनीति के तहत बीजेपी ने सभी राज्यों के अपने बड़े नेताओं के जरिये विपक्षी एकता पर हमला भी कर रही है।            
  झारखंड विधानसभा में बीजेपी  विधायक दल के नेता एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने जदयू के शीर्ष नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के प्रयास पर कटाक्ष करते हुए कहा कि  कुमार भष्टाचार के पोषक दलों को एकजूट करने का प्रयास कर रहे हैं जो दुर्भाग्य पूर्ण है और इससे लोकतंत्र कमजोर होगा।    मरांडी ने कहा कि  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भष्टाचार के पोषक दलों को एकजुट कर रहे हैं । यह आश्चर्यजनक है । भाजपा के खिलाफ कथित गठजोड़ में साम्राज्यवाद और परिवारवादी विचार धारा वाले दल के लोग शामिल हो रहे हैं, जिन्होंने समाज के विकास में कोई तपस्या नहीं की है। इस तरह के प्रयास से लोकतंत्र कमजोर होगा और आगामी चुनाव में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
              इसी क्रम में उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अंतिम पारी खेल रहे हैं। उन्होंने झारखंड में 60-40 प्रतिशत नियोजन नीति के विरोध में छात्रों और युवाओं के विरोध पर कहा कि भाजपा तृर्तीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने का समर्थन करता रहा है। राज्य गठन के बाद 2016 तक यही नीति कायम रही लेकिन झामुमो की सरकार ने उस नीति को बदल कर राज्य के शिक्षित नौजवानों के साथ विश्वासघात किया है। इस कारण अगले चुनाव में झामुमो का सुपड़ा साफ होना तय है।
                उधर ,भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत विरोधी दलों के बीच मौजूद अंतर्विरोध और टकराव को और ज्यादा उभारने का प्रयास करना शुरू कर दिया है। जिस बिहार में नीतीश कुमार विपक्षी दलों की एकता का बिगुल बजाने का प्रयास कर रहे हैं, उसी बिहार में लंबे समय तक जेडीयू-भाजपा गठबंधन सरकार में उनके साथ उपमुख्यमंत्री रह चुके वर्तमान भाजपा राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी यह सवाल पूछ रहे हैं कि मोदी के मुकाबले कौन? सुशील मोदी ‘हाथ मिलाने से दिल नहीं मिलने’ की बात कहते हुए विपक्षी एकता के तमाम पैरोकारों को अपना नेता चुनने की चुनौती भी दे रहे हैं।
           वहीं दिल्ली में अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इशारों-इशारों में यह कटाक्ष भी कर रहे हैं कि विपक्ष में नेता बनने के लिए बिहार से लेकर तेलंगाना तक पहले से ही कई दावेदार हैं और अब इस रेस में दिल्ली वाले  भी शामिल हो गए हैं।
          पश्चिम बंगाल में भाजपा कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के बीच चल रहे राजनीतिक वार-प्रतिवार का जिक्र करते हुए पूछ रही है कि बंगाल में लड़ाई और दिल्ली में दोस्ती, यह कौन सी राजनीति है? केरल में भी लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस की लड़ाई के मसले को लेकर लगातार सवाल पूछा जा रहा है। वहीं केजरीवाल और कपिल सिब्बल के रामलीला मैदान में एक मंच पर नजर आने की आलोचना करते हुए भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा पूछ रहे हैं कि जिन सिब्बल को केजरीवाल भ्रष्टाचारी कह रहे थे, आज उन्हीं को अपने मंच पर ला रहे हैं।
           नीतीश कुमार द्वारा बुलाई गई बैठक में बीआरएस मुखिया के.चंद्रशेखर राव, बसपा सुप्रीमो मायावती, बीजेडी मुखिया नवीन पटनायक और जेडीएस सहित अन्य कई विरोधी दलों के शामिल नहीं होने पर भी भाजपा कटाक्ष कर रही है।
                दरअसल, भाजपा विपक्षी मोर्चे के गठन को लोकसभा चुनाव में बेअसर करने के लिए एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रही है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर भाजपा अन्य राज्यों में भी छोटे दलों के साथ गठबंधन कर अपने जनाधार को 50 प्रतिशत मत तक ले जाने की कोशिश करेगी और अखिलेश यादव-मायावती गठबंधन की तर्ज पर विपक्षी दलों के गठबंधन के अंदर मौजूद अंतर्विरोध और टकराव को ज्यादा से ज्यादा उभारने की कोशिश कर उनके कार्यकर्ताओं और सीधे मतदाताओं को राजनीतिक संदेश देने का प्रयास करेगी।
               उधर मध्य प्रदेश बीजेपी  के प्रभारी मुरलीधर राव ने कहा कि नरेंद्र मोदी देश की जनता के आशीर्वाद से प्रधानमंत्री बने हैं और 9 वर्षों के उनके कार्यकाल में देश यह महसूस करने लगा है कि देश की हर समस्या का समाधान भाजपा और मोदी के पास है। राव ने कहा कि डबल इंजन वाली सरकार के कार्यकाल में किसानों को किसान सम्मान निधि भी डबल मिल रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी जहां हर साल 6 हजार रुपये दे रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री श्री चौहान हर साल 4 हजार रुपये दे रहे हैं। इसके पीछे मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री की सोच किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here