Asif Ali Zardari Statement: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का हिंदुओं और ‘अखंड भारत’ को लेकर दिया गया बयान अब चर्चा का विषय बन गया है। पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए गए बयान में जरदारी ने कहा कि भारतीय ‘अखंड भारत’ की सोच में विश्वास रखते हैं, जबकि पाकिस्तान की सोच अलग है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू स्वतंत्र हैं और उनमें से कई भारत जाने के बजाय पाकिस्तान में रहना पसंद करेंगे।
जरदारी ने अपने बयान में पाकिस्तान में हिंदू समुदाय को लेकर ‘बर्दाश्त’ शब्द का इस्तेमाल किया। इसी शब्द को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि किसी देश के राष्ट्रपति द्वारा अपने ही देश के अल्पसंख्यक नागरिकों के लिए ‘बर्दाश्त करने’ जैसी भाषा का इस्तेमाल किस तरह देखा जाना चाहिए।
अखंड भारत को लेकर क्या बोले जरदारी?
जरदारी के मुताबिक भारत में ‘अखंड भारत’ की विचारधारा को लेकर विश्वास है, जबकि पाकिस्तान की मुस्लिम पहचान अलग है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू आजाद हैं और वे भारत की तुलना में पाकिस्तान में रहना पसंद करेंगे। हालांकि, उनके इस दावे की तुलना पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की स्थिति से जुड़ी विभिन्न रिपोर्टों से भी की जा रही है।
पाकिस्तान की जनगणना में कितने हिंदू?
पाकिस्तान की 2023 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार देश की कुल आबादी 24.04 करोड़ से अधिक थी। इसमें Hindu Jati की आबादी करीब 38.68 लाख यानी 1.61 फीसदी दर्ज की गई है। इसके अलावा Scheduled Castes की आबादी करीब 13.49 लाख यानी 0.56 फीसदी दर्ज है। दोनों श्रेणियां जनगणना में अलग-अलग दर्ज की गई हैं।
सिंध पाकिस्तान का वह प्रांत है जहां हिंदू समुदाय की सबसे बड़ी आबादी रहती है। आधिकारिक आंकड़ों में सिंध में Hindu Jati की आबादी करीब 35.76 लाख दर्ज है।
धार्मिक उत्पीड़न और पलायन पर भी उठते रहे हैं सवाल
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की स्थिति को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय और मानवाधिकार रिपोर्टें चिंता जाहिर करती रही हैं। Minority Rights Group की रिपोर्ट में धार्मिक कट्टरता, भेदभाव, हिंसा और जबरन धर्मांतरण जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सिंध में हिंदू समुदाय के बीच असुरक्षा और पलायन को लेकर चिंताएं सामने आती रही हैं।
‘हर साल 5,000 हिंदू पाकिस्तान छोड़ते हैं’ वाला आंकड़ा भी वर्षों से विभिन्न रिपोर्टों और पाकिस्तानी नेताओं के बयानों में सामने आता रहा है। हालांकि यह पुराना अनुमान है, मौजूदा आधिकारिक वार्षिक आंकड़ा नहीं, इसलिए इसे वर्तमान स्थिति का निश्चित आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा।
जबरन धर्मांतरण का मुद्दा भी चर्चा में
पाकिस्तान में हिंदू और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चर्चा के दौरान जबरन धर्मांतरण और अल्पसंख्यक महिलाओं के अपहरण के आरोप भी सामने आते रहे हैं। Minority Rights Group ने विशेष रूप से सिंध और पंजाब में हिंदू महिलाओं और लड़कियों के जबरन धर्मांतरण की समस्या का उल्लेख किया है।
वहीं, अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की 2025 रिपोर्ट ने भी पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं दर्ज की हैं।
जरदारी के बयान ने क्यों बढ़ाई बहस?
एक तरफ जरदारी पाकिस्तान में हिंदुओं को सुरक्षित और स्वतंत्र होने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उपलब्ध रिपोर्टें धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने मौजूद चुनौतियों की ओर इशारा करती हैं। यही विरोधाभास अब उनके बयान को चर्चा के केंद्र में ले आया है।
खास तौर पर ‘बर्दाश्त’ शब्द ने बहस को और तेज कर दिया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को समान नागरिक अधिकारों के नजरिए से देखा जाता है या बहुसंख्यक समाज की सहनशीलता के नजरिए से।

