Yemen War: यमन में संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़े जमीनी सैन्य अभियान की शुरुआत कर दी है। अभियान का प्रमुख लक्ष्य दक्षिण-पश्चिमी यमन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तैज इलाके को हूती नियंत्रण से मुक्त कराना बताया गया है।
सऊदी अरब के समर्थन वाली राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (PLC) के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने रविवार को सैन्य कार्रवाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हूतियों के साथ तनाव कम करने के लिए उपलब्ध सभी रास्ते आजमाए जा चुके हैं और अब सैन्य कार्रवाई के अलावा विकल्प नहीं बचा है।
सना पर सऊदी अरब की एयर स्ट्राइक
यमन सरकार के अभियान के बीच सऊदी अरब ने हूती नियंत्रण वाले राजधानी सना में हवाई हमले किए। हूती समर्थित अल-मसीरा टीवी के मुताबिक, शहर में कई जोरदार धमाके सुनाई दिए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, लड़ाकू विमानों की आवाज के साथ हुए धमाकों से घरों की खिड़कियां तक हिल गईं। कई परिवारों में दहशत फैल गई और बच्चे डरकर जाग उठे। स्थानीय स्तर पर दावा किया गया कि हमलों का निशाना हूती संगठन के ठिकाने थे। फिलहाल हमलों में किसी के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रियाद में अरामको को निशाना बनाने का दावा
इससे पहले हूती विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी राजधानी रियाद में अरामको की एक सुविधा पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला करने का दावा किया था। हूतियों ने इसे यमन में सऊदी कार्रवाई का जवाब बताया।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेया के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में यमन के अलग-अलग हिस्सों में करीब 60 हवाई और मिसाइल हमले किए गए।
बाब अल-मंडेब पर नियंत्रण भी अहम लक्ष्य
इस सैन्य अभियान के पीछे रणनीतिक कारण भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। अभियान के लक्ष्यों में बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हासिल करना शामिल है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और सऊदी तेल निर्यात के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
यमन सरकार के साथ सऊदी अरब की सेनाएं पिछले कई सप्ताह से इस अभियान की तैयारी कर रही थीं। हजारों सरकारी समर्थक सैनिक जमीनी कार्रवाई में हिस्सा ले रहे हैं, जबकि सऊदी सेना मुख्य रूप से हवाई सुरक्षा और हूती ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की भूमिका निभा रही है। लंबे समय से हूती नियंत्रण में रही राजधानी सना को वापस हासिल करना भी इस अभियान के बड़े उद्देश्यों में शामिल बताया गया है।
सितंबर से लगातार बढ़ रहा तनाव
सितंबर में सरकारी बलों और हूतियों के बीच संघर्ष तेज होने के बाद हालात और बिगड़े। रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने 10 सितंबर को लाल सागर के तट पर स्थित मोचा बंदरगाह पर कब्जा किया और अगले ही दिन रणनीतिक मय्यून द्वीप पर भी नियंत्रण हासिल कर लिया।
यमन का मौजूदा संघर्ष 2014 के अंत में तेज हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान शुरू किया था।

