यूनिवर्सल हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (UHO)—न्यूज़ लेटर 19 मई 2023

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यह साप्ताहिक समाचार पत्र दुनिया भर में महामारी के दौरान पस्त और चोटिल विज्ञान पर अपडेट लाता है। साथ ही कोरोना महामारी पर हम कानूनी अपडेट लाते हैं ताकि एक न्यायपूर्ण समाज स्थापित किया जा सके। पारदर्शिता,सशक्तिकरण और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए ये छोटा कदम है, यही यूएचओ का लोकाचार है।

जानी-मानी वायरोलॉजिस्ट डॉ. सुचरित भाकड़ी पर कोविड-19 को कमजोर बताने और गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया है। डॉ. सुचरित भाकड़ी, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी और इम्यूनोलॉजी की प्रोफेसर एमेरिटस हैं और पूर्व अध्यक्ष, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड हाइजीन, जोहान्स गुटेनबर्ग यूनिवर्सिटी ऑफ मेंज के पद पर हैं। उन पर जर्मनी में कोविड-19 को कमजोर बताने और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया गया है। वह जर्मन अदालत में सुनवाई का सामना कर रहे हैं। वाकई में हम अजीब समय में जी रहे हैं। डेटा और बहस के माध्यम से वैकल्पिक विचार रखने वाले शोधकर्ताओं का खंडन करने के बजाय, सेंसरशिप और अदालती कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।चिकित्सा परिषदों द्वारा वैज्ञानिकों को चुप कराया जा रहा है (डॉ शंकर चेट्टी, जिन्होंने अपने प्रोटोकॉल से दक्षिण अफ्रीका में हजारों कोविड-19 रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज किया है उन्हें Health Professional Council South Africa द्वारा निशाना बनाया गया है)

इस तरह से वैज्ञानिक को चुप कराने से जनता का भरोसा और कमजोर होगा। यह ईमानदार और मेधावी डॉक्टरों को भी हतोत्साहित करेगा। वैसे चाटुकार वैज्ञानिक जो दूसरों की लाइन पर चलते हैं वे सत्ता पर काबिज होंगे। ऐसे औसत दर्जे के शोधकर्ताओं के प्रभाव में लोग पीड़ित होंगे। कोई डॉ भाकड़ी या डॉ चेट्टी के विचारों से सहमत है या नहीं यह महत्वहीन है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि असहमति और बहस, विज्ञान का सार है लेकिन उसका गला घोंटा जा रहा है। इसे देखते हुए, यह मानवता के हित में है कि सभी विचारशील लोग डॉ. भाकड़ी, डॉ चेट्टी और कई अन्य लोगों के समर्थन में खुलकर सामने आएं, जिन्हें सेंसर या पीड़ित किया गया है। जब विज्ञान असहमति और बहस के माध्यम से “अग्नि-परीक्षा” द्वारा शुद्धिकरण से गुजरता है तो हम उस पर फिर से भरोसा कर सकते हैं।

सुरंग के अंत में प्रकाश की किरण दिख रही है- मई 2023 के पहले सप्ताह में विश्व प्रसिद्ध डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को यूरोपीय संसद में अंतर्राष्ट्रीय कोविड शिखर सम्मेलन के दौरान सुनवाई का मौका मिला है। प्रसिद्ध डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को यूरोपीय संसद में अंतर्राष्ट्रीय कोविड शिखर सम्मेलन के दौरान एक वायरस जिसमें फ्लू जैसी घातकता थी, के लिए अतिशयोक्तिपूर्ण और अनाड़ी प्रतिक्रियाओं के बारे में अपनी आपत्ति को पेश करने का अवसर दिया गया। बड़े पैमाने पर टीकाकरण के बाद विभिन्न देशों में कैंसर की दर में अधिकता देखने को मिली है और बूटी लेने के बाद मृत्यु दर में इजाफा हुआ है। उन्होंने शरीर के विभिन्न ऊतकों में फैलने वाले स्पाइक प्रोटीन के बारे में भी चिंता व्यक्त की है। एमआरएनए और एडिनोवायरस वेक्टर वैक्सीन, एस्ट्राजेनेका (कोविशील्ड) सहित अधिकांश टीकों में नैनोकणों से होने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर भी चर्चा की गई।

पिछले तीन वर्षों में टीकों को सुरक्षित और प्रभावी बताने के लिए किए गए प्रचार को भी यूरोमोमो डेटा से हासिल मजबूत आंकड़ों द्वारा चुनौती दी गई थी। उम्मीद है कि ईमानदार और समर्पित वैज्ञानिक डॉ भाकड़ी और डॉ चेट्टी जैसे सताए गए डॉक्टरों के बचाव में आ सकते हैं।इन विस्फोटक सत्रों की कार्यवाही को इस लिंक पर जाकर देखा जा सकता है: https://youtu.be/hv0lM_OJWG0 तो चर्चाओं का संक्षिप्त सार यहां देखा जा सकता है: https://youtu.be/TuZ7-J7d0jk। हैरानी की बात है कि मुख्यधारा के मीडिया ने इन कार्यवाही को कवर नहीं किया है।

अग्नाशय के कैंसर के लिए MSK mRNA टीके

मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर के एक बयान में दावा किया गया है कि mRNA के टीके विज्ञान में सबसे अधिक भरोसेमंद है। इसमें गलत तरीके से कहा गया है कि इन टीकों ने संक्रमण को रोककर कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई का रुख मोड़ दिया! कोविड-19 में एमआरएनए टीकों की भूमिका को आंकने के बाद, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अग्नाशय के कैंसर के इलाज में एमआरएनए वैक्सीन के पहले चरण के परीक्षण ने असर दिखाया है। नेचर में प्रकाशित परिणाम सुझाव देते हैं कि 16 में से 8 रोगियों में टीके ने टी-सेल प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रेरित किया। ये कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन्हंि खत्म कर सकती हैं। इस कैंसर से उच्च मृत्यु दर को देखते हुए, पांच साल की जीवित रहने की दर 5% है (स्टीव जॉब्स का इसने शिकार किया), यह जोखिम के लायक होगा यदि कई केंद्रों में बड़े large randomized clinical trial के परिणाम मामूली होने पर भी कुछ असर दिखाते हैं।

MSK, जो वैक्सीन के निर्माता हैं, इस गर्मी में तीसरे चरण के परीक्षणों के लिए प्रतिभागियों का नामांकन शुरू करने का इरादा रखते हैं।

CDC ने चुपचाप संयुक्त राज्य अमेरिका में जॉनसन और जॉनसन के सभी टीकों को हटाया
“जानसेन COVID-19 वैक्सीन अब अमेरिका में उपलब्ध नहीं है। 19 मिलियन से अधिक अमेरिकियों ने जॉनसन एंड जॉनसन” का सुरक्षित और प्रभावी “वैक्सीन प्राप्त किया। भंडारण में 12.5 मिलियन खुराक को तुरंत नष्ट किया जाना है। हालांकि स्वास्थ्य एजेंसी ने यह नहीं बताया कि वे टीके को वापस क्यों मंगवा रहे हैं।

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी है स्मार्टफोन लेने की उम्र

27,969 युवाओं को शामिल करने वाले एक बड़े अध्ययन से पता चला है कि जिस उम्र में उन्हें अपना पहला स्मार्टफोन या टैबलेट मिला, वह उनके मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित है। स्मार्टफोन लेने की अधिक उम्र युवाओं में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी थी। स्मार्टफोन ने उनके आत्मविश्वास और दूसरों के साथ बातचीत करने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।स्मार्टफोन हासिल करने की कम उम्र भी आत्मघाती विचारों, दूसरों के प्रति शत्रुता और वास्तविकता से अलग होने की भावना से जुड़ी थी। ये रुझान महिलाओं में अधिक थे और संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूरोप, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया सहित कई महाद्वीपों में समान थे। इस अध्ययन के नतीजे माता-पिता, स्कूल के शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हैं।हम महामारी के दौरान स्कूल बंद होने और स्मार्टफोन/टैबलेट के माध्यम से दूरस्थ शिक्षा के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का अनुमान लगा सकते हैं। युवाओं की एक पूरी पीढ़ी जीवन भर के लिए प्रभावित हो सकती है।

यौन गतिविधि की शुरुआत की कम उम्र: यौन शिक्षा पर डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देशों की गलत व्याख्या?

जबकि हाल के शोध से पता चलता है कि कम उम्र में स्मार्टफोन का उपयोग अच्छा नहीं है, यह सामान्य ज्ञान है कि कम उम्र में यौन गतिविधियों को हतोत्साहित किया जाना चाहिए क्योंकि यह बच्चे को यौन संचारित रोगों, अवांछित गर्भधारण और यौन अपराध के लिए प्रेरित करता है। हालांकि यह अविश्वसनीय लगता है लेकिन स्टॉप वर्ल्ड कंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार डब्ल्यूएचओ बच्चों के बीच जल्दी यौन गतिविधि शुरू करने की सलाह दे रहा है। इस विचित्र रिपोर्ट के लिए एकमात्र प्रशंसनीय व्याख्या यह है कि WHO द्वारा 14 मार्च 2018 को प्रकाशित यौनिकता शिक्षा पर अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी मार्गदर्शन की गलत व्याख्या की गई है और इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए पाठक दोनों रिपोर्टों को देख सकते हैं https://dailysceptic.org/2023/05/14/outrage-over-who-guidance-on-sexuality-for-infants/

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