विकास कुमार
कंगाल पाकिस्तान के जख्मों पर आईएमएफ ने फिर से नमक मिर्च रगड़ दिया है। पाकिस्तान के हुक्मरान एक दशमलव एक अरब डॉलर की किस्त के लिए आईएमएफ के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं। लेकिन आईएमएफ ने पाकिस्तान के सामने एक बड़ी शर्त रख दी है। तो वहीं आईएमएफ ने श्रीलंका और इजिप्ट के लिए तीन तीन अरब डॉलर की किस्त देने को मंजूरी दे दी है। यूक्रेन को 15 अरब डॉलर और अर्जेंटीना को 5 दशमलव 4 अरब डॉलर की मदद देने का आईएमएफ ने ऐलान कर दिया है। आईएमएफ के इस फैसले से पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर खड़ा हो गया है। क्योंकि 14 मार्च तक पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में केवल 2 दशमलव 9 अरब डॉलर ही बचे थे।

लंबे अरसे से पाकिस्तान आईएमएफ से मदद मिलने का इंतजार कर रहा है। लेकिन आईएमएफ की नई शर्त से वजीरे आजम शहबाज शरीफ की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आईएमएफ की शर्त के मुताबिक पाकिस्तान को सऊदी अरब,यूएई,चीन,एडीबी और इस्लामिक बैंक से पहले लिखवाना होगा कि वह वादे के मुताबिक पाकिस्तान को आर्थिक सहायता देंगे। जबकि ये देश और बैंक पहले से ही आईएमएफ का मुंह ताक रहे हैं। ये देश देख रहे हैं कि आईएमएफ पहले पाकिस्तान की इकोनॉमी को हेल्थ सर्टिफिकेट दे दे। फिर वे अपने बटुए ढीले करेंगे। अब कोई देश बिना किसी जमानत के अरबों डॉलर पाकिस्तान को कर्ज देने के लिए तैयार नहीं है।

आईएमएफ से पैसे मिलता ना देख पाकिस्तानी हुक्मरान तरह तरह के बहाने बनाने लगे हैं। पाकिस्तानी हुक्मरानों ने ये बहाना बनाया कि वे किसी दबाव में अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को बंद नहीं करेंगे। लेकिन जब विवाद बढ़ा तो आईएमएफ ने ये साफ कर दिया कि उनका पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से कोई लेना देना नहीं है। इससे पाकिस्तानी सरकार के झूठ का भांडा फूट गया।
पाकिस्तान को आईएमएफ प्रोग्राम में जाने के लिए अपनी बुनियादी नीति में ये बदलाव लाना होगा।
- पाकिस्तान को अमीरों पर लगाना होगा ज्यादा टैक्स
- पाकिस्तान को सैन्य खर्चों में करनी होगी भारी कटौती
- पाकिस्तान को सब्सिडी पर खर्च में करनी होगी बड़ी कटौती
- पाकिस्तान को सरकारी खर्चों में करनी होगी भारी कमी
- सरकारी कर्मचारियों की संख्या में करनी होगी कमी
- बिजली की दरों में पाकिस्तान को करना होगा इजाफा
- एलपीजी की कीमत में भी करना होगा सरकार को इजाफा
- इस्लामिक कट्टरपंथी ताकतों पर लगानी होगी नकेल
- टैक्स पेयरों की संख्या में पाकिस्तान को करना होगा इजाफा
- चीन के साथ सीपीईसी डील को करना होगा सार्वजनिक

अगर पाकिस्तानी सरकार इन सुधारों को अपनाती है तो वहां सिविल वार छिड़ने का खतरा पैदा हो जाएगा । क्योंकि पहले ही महंगाई की मार से दबी आम जनता अब और महंगाई बर्दाश्त करने की स्थिति में ही नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर पाकिस्तान इस संकट में फंसा क्यों है। दरअसल पाकिस्तान में आज भी जमींदारी सिस्टम को मान्यता मिली हुई हैं ये जमींदार हजारों एकड़ जमीन के मालिक हैंं ये जमींदार भारी मुनाफा कमाते हैं लेकिन एक पैसा भी टैक्स नहीं भरते हैं। जमींदारी सिस्टम की वजह से पाकिस्तान में मिडिल क्लास पनप ही नहीं पाया है। इसलिए पाकिस्तानी सरकार के पास रेवेन्यू जमा करने के संसाधन ही नहीं हैं। अमीर जमींदार एक तो टैक्स नहीं देते। दूसरी तरफ मिडिल क्लास ना होने से टैक्स पेयरों की संख्या जस की तस बनी हुई है। वहीं सत्ता से बेदखल होने के बाद से इमरान खान ने पाकिस्तानी इस्टेबलिशमेंट के नाक में दम कर रखा है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान का दिवालिया होना तय माना जा रहा है। बस इसके ऐलान होने में कुछ समय बाकी रह गया है

