US Weapons Stock पर बड़ा संकट! ईरान संघर्ष के बाद Pentagon ने Defense कंपनियों को दिया 21 दिन का अल्टीमेटम

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US Weapons Stockpile: ईरान के साथ लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी हथियारों के भंडार को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स और रणनीतिक विश्लेषणों में कहा जा रहा है कि लंबे संघर्ष के कारण अमेरिका के सटीक हमले वाली मिसाइलों और एयर-डिफेंस हथियारों के स्टॉक पर दबाव बढ़ा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थिति को देखते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी Pentagon ने प्रमुख रक्षा कंपनियों से उत्पादन क्षमता बढ़ाने की विस्तृत योजना मांगी है। कंपनियों को कथित तौर पर 21 दिनों के भीतर अपनी उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पेश करने को कहा गया है।

THAAD और Patriot स्टॉक में बड़ी गिरावट का दावा

Center for Strategic and International Studies (CSIS) से जुड़े आकलन के अनुसार अमेरिकी मिसाइल-डिफेंस हथियारों के भंडार पर युद्ध का असर पड़ा है। रिपोर्ट में THAAD और Patriot सिस्टम से संबंधित स्टॉक में लगभग 38% से 65% तक कमी का दावा किया गया है।

इसके अलावा संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में Tomahawk क्रूज मिसाइलों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है। यदि उत्पादन की मौजूदा गति धीमी रहती है तो इस्तेमाल किए गए हथियारों की भरपाई में काफी लंबा समय लग सकता है।

चीन-ताइवान जैसे संभावित संकट ने बढ़ाई चिंता

अमेरिकी रक्षा योजनाकारों के लिए चिंता सिर्फ मौजूदा संघर्ष तक सीमित नहीं है। रणनीतिक विशेषज्ञों का सवाल है कि अगर पश्चिम एशिया में लंबे सैन्य अभियान के बाद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कोई बड़ा संकट पैदा होता है, तो क्या अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार और एयर-डिफेंस सिस्टम मौजूद रहेंगे?

विशेष रूप से चीन-ताइवान से जुड़ा संभावित सैन्य संकट अमेरिकी रणनीतिक योजनाकारों के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है। कम होते हथियार भंडार के कारण लंबी अवधि के संघर्ष में अमेरिका की क्षमता पर सवाल उठ सकते हैं।

Pentagon ने Defense Industry को दिया उत्पादन बढ़ाने का निर्देश

अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान अब हथियारों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार उप-रक्षा सचिव Steve Feinberg ने रक्षा कंपनियों को संकेत दिया है कि दशकों पुरानी धीमी उत्पादन प्रक्रिया को बदलने की जरूरत है।

लक्ष्य सिर्फ उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि डिलीवरी की रफ्तार और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता दोनों में बड़ा इजाफा करना है।

इसी दिशा में Lockheed Martin और Northrop Grumman जैसी प्रमुख रक्षा कंपनियों के साथ अरबों डॉलर के समझौतों का भी उल्लेख किया गया है। इनका उद्देश्य Patriot और THAAD जैसे सिस्टम के जरूरी हिस्सों और रॉकेट मोटर्स का उत्पादन तेज करना बताया जा रहा है।

Patriot और THAAD का उत्पादन कई गुना बढ़ाने की तैयारी

अमेरिकी रक्षा विभाग की योजना Patriot मिसाइल सिस्टम की उत्पादन क्षमता को मौजूदा स्तर की तुलना में तीन गुना तक बढ़ाने की है। वहीं THAAD सिस्टम के उत्पादन को चार गुना करने का लक्ष्य बताया गया है।

इसका उद्देश्य युद्ध में इस्तेमाल हुए हथियारों की भरपाई के साथ-साथ भविष्य में संभावित सैन्य संकटों के लिए पर्याप्त रणनीतिक भंडार तैयार करना है।

हथियारों का स्टॉक फिर भरने में लग सकते हैं कई साल

हथियारों के उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के बावजूद सबसे बड़ी चुनौती समय की है। CSIS के आकलन के मुताबिक इस्तेमाल हुए कुछ प्रमुख हथियारों के स्टॉक को दोबारा पुराने स्तर पर पहुंचने में कई साल लग सकते हैं।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि THAAD और Patriot के भंडार की पूरी भरपाई 2029 के अंत तक और Tomahawk मिसाइलों की रिकवरी 2030 के अंत तक हो सकती है।

यानी उत्पादन बढ़ाने के बावजूद अमेरिकी रक्षा उद्योग को पुराने स्टॉक को दोबारा मजबूत करने में लंबा समय लग सकता है।

Trump ने हथियारों की कमी के दावे को नकारा

हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से हथियारों की भारी कमी के दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने कथित तौर पर ऐसे दावों को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार मौजूद हैं और जरूरत के अनुसार नए हथियारों का निर्माण भी लगातार हो रहा है।

Pentagon का भी रुख यही है कि अमेरिकी सेना के पास मौजूदा अभियानों को संचालित करने के लिए पर्याप्त हथियार हैं। हालांकि, बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए गए हथियारों के भंडार को दोबारा भरने में समय लगना अलग मुद्दा है।

अमेरिकी Congress में रक्षा बजट पर घमासान

हथियारों के उत्पादन और स्टॉक को लेकर चर्चा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी संसद में Defense Budget को लेकर भी बहस चल रही है।

Trump प्रशासन की ओर से रक्षा खर्च को बढ़ाकर करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस बजट पर कांग्रेस में चर्चा जारी है।

अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो अमेरिकी रक्षा उद्योग की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, मिसाइल भंडार मजबूत करने और नई सैन्य तकनीक पर खर्च बढ़ाने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

अमेरिका के सामने असली चुनौती क्या है?

मौजूदा घटनाक्रम से एक बात साफ है—अमेरिकी रक्षा रणनीति के सामने चुनौती सिर्फ हथियारों की उपलब्धता नहीं, बल्कि तेजी से हथियार बनाने की क्षमता भी है।

लंबे संघर्ष में सटीक मिसाइलों और एयर-डिफेंस सिस्टम की बड़ी खपत होने पर किसी भी देश को अपने रणनीतिक भंडार और उत्पादन क्षमता के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। अमेरिका अब इसी चुनौती से निपटने के लिए अपनी रक्षा उत्पादन श्रृंखला को तेज करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

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