Indus Water Treaty: अमेरिका में पाकिस्तान की बड़ी किरकिरी? सिंधु जल संधि पर बुलाए विदेशी एक्सपर्ट, कोई नहीं पहुंचा

0
7

Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की पाकिस्तान की कोशिश को अमेरिका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बड़ा झटका लगा। वॉशिंगटन में 28 और 29 अगस्त को हुई नीति संबंधी चर्चा में पाकिस्तानी विशेषज्ञ और वक्ता तो मौजूद रहे, लेकिन जिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को कार्यक्रम में शामिल किए जाने की उम्मीद थी, उनमें से कोई भी सत्र का हिस्सा नहीं बना।

इस चर्चा में मौजूद पाकिस्तानी वक्ताओं ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक या सुरक्षा तनाव को Indus Waters Treaty (IWT) से अलग रखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि दोनों देशों के बीच विवादों के बावजूद पानी के बंटवारे की व्यवस्था को कानूनी और संस्थागत ढांचे के तहत आगे बढ़ाना जरूरी है।

पाकिस्तान के अपने विशेषज्ञों ने भी दिया संधि बचाने का तर्क

वॉशिंगटन में हुई बातचीत के दौरान पाकिस्तान की ओर से शामिल वक्ताओं ने माना कि दोनों देशों के बीच तनाव का असर सिंधु जल संधि की व्यवस्था पर नहीं पड़ना चाहिए। चर्चा में यह तर्क सामने आया कि भारत-पाकिस्तान के बीच कई युद्ध और गंभीर राजनीतिक संकट आने के बावजूद यह समझौता लंबे समय तक कायम रहा है।

पाकिस्तानी विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि राजनीतिक तनाव के कारण अगर संधि का मौजूदा ढांचा कमजोर होता है, तो इसका सीधा असर पानी से जुड़े सहयोग पर पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने संधि की शर्तों और उसके संस्थागत तंत्र को बनाए रखने की जरूरत बताई।

विदेशी विशेषज्ञों की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का केंद्र

पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया था। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को आमंत्रित किए जाने के बावजूद कोई विदेशी जल विशेषज्ञ या अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ चर्चा के सत्रों में शामिल नहीं हुआ।

कार्यक्रम में बोस्टन यूनिवर्सिटी से जुड़े एक प्रोफेसर की मौजूदगी जरूर रही, लेकिन वह पाकिस्तान के जाने-माने शिक्षाविद और लाहौर यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर आदिल नजम थे। इसलिए उनकी मौजूदगी को स्वतंत्र विदेशी विशेषज्ञों की भागीदारी के तौर पर नहीं देखा गया।

यही वजह है कि कार्यक्रम में पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश को लेकर सवाल उठे। चर्चा के दौरान कुछ पाकिस्तानी विशेषज्ञों ने भविष्य में अधिक निष्पक्ष और अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्था तैयार करने की संभावना पर विचार करने की बात कही।

UN की भूमिका का भी सुझाव

बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि सिंधु जल संधि से जुड़े विवादों के समाधान के लिए एक ऐसा तंत्र तलाशा जा सकता है जिसमें किसी निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय संस्था की भूमिका हो। इसी संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र यानी UN की संभावित भूमिका का भी उल्लेख किया गया।

इसके अलावा कुछ पाकिस्तानी वक्ताओं ने चीन से भी सलाह लेने की जरूरत बताई। उनका मानना था कि इस विवाद के संभावित परिणामों पर चीन का प्रभाव हो सकता है और इसलिए पाकिस्तान को उसके रुख को भी ध्यान में रखना चाहिए।

World Bank से पाकिस्तान को नहीं मिली मध्यस्थता की उम्मीद

सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान लंबे समय से विश्व बैंक की भूमिका की बात करता रहा है। हालांकि विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय विवाद में बैंक की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।

इससे पाकिस्तान की उस उम्मीद को झटका लगा जिसमें वह विश्व बैंक से दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की अपेक्षा कर रहा था।

संधि के कानूनी ढांचे को बनाए रखने पर जोर

वॉशिंगटन की चर्चा में एक बात बार-बार सामने आई कि सिंधु जल संधि के कानूनी और संस्थागत ढांचे को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बावजूद पानी के मुद्दे को अलग चैनल के जरिए संभालना महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, अमेरिका में हुई इस चर्चा में पाकिस्तान को वह व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी नहीं मिल सकी जिसकी वह उम्मीद कर रहा था। वहीं, बैठक में मौजूद पाकिस्तानी विशेषज्ञों ने भी संधि को राजनीतिक और सुरक्षा विवादों से अलग रखने की जरूरत पर जोर दिया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here