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इसरो ने फिर किया कमाल,पुष्पक की लैंडिंग ने रचा इतिहास

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न्यूज डेस्क
अंतरक्षि की दुनिया में इसरो ने कामयाबी की नयी कहानी लिखी है। इसरो ने लगातार तीसरी बार रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (आरएलवी) पुष्पक की लैंडिंग एक्सपेरिमेंट (एलईएक्स) में सफलता हासिल की। तेज हवा होने के बावजूद पुष्पक ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच सफल लैंडिंग की है। इस मिशन में अंतरिक्ष से लौटने वाले यान को तेज हवाओं के बीच उतारने का अभ्यास किया गया।

पुष्पक’ की सफल लैंडिंग को लेकर इसरो ने बताया कि इससे पहले हमारा आरएलवी एलईएक्स-01, आरएलवी एलईएक्स-02 मिशन भी सक्सेसफुल रहा था। इस बार चुनौतियां ज्यादा थीं, हवा तेज थी और ‘पुष्पक’ को रनवे से 4.5 किलोमीटर दूर, 4.5 किलोमीटर की ऊंचाई से छोड़ा गया था। पुष्पक ने बड़ी ही कुशलता से हवा में अपना रास्ता खुद बनाया और रनवे पर उतर गया।

यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि पुष्पक की रफ्तार किसी आम हवाई जहाज या लड़ाकू विमान से कहीं ज्यादा थी। 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उतरने के बाद ब्रेक पैराशूट की मदद से इसकी रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक लायी गई। इसके बाद इसके पहियों के ब्रेक ने काम किया और यह पूरी तरह से रुक गया। जमीन पर चलते हुए पुष्पक ने अपने आप ही संतुलन बनाए रखा और रनवे पर सीधा चलता रहा।

इसरो ने साथ ही बताया कि इस वाहन का लिफ्ट-टू-ड्रैग अनुपात कम होने से लैंडिंग की रफ्तार 320 किमी प्रति घंटे से अधिक थी, जबकि कमर्शियल प्लेन के लिए यह 260 किमी प्रति घंटे और एक सामान्य लड़ाकू विमान के लिए 280 किमी प्रति घंटे होती है।

इसरो ने कहा कि लैंडिंग के बाद, वाहन की रफ्तार को करीब 100 किमी प्रति घंटे तक कम करने के लिए ब्रेक पैराशूट का उपयोग किया गया। फिर लैंडिंग गियर ब्रेक का उपयोग करके वाहन को रनवे पर धीमा करके रोक दिया गया।

आरएलवी लेक्स मिशन इनर्शियल सेंसर, रडार अल्टीमीटर, फ्लश एयर डाटा सिस्टम, स्यूडो लाइट सिस्टम और नाविक जैसे सेंसरों से लैस था। इसरो ने कहा कि अब उसका लक्ष्य ‘आरएलवी-ओआरवी, दोबारा इस्तेमाल हो सकने वाले ऑर्बिटल अंतरिक्ष यान का परीक्षण करना है।

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