विधानसभा चुनाव में सत्ता गवाने के बाद ममता बनर्जी के लिए अपनी पार्टी बचाना भी हो रहा मुश्किल

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मई महीने में पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव परिणाम आने पर वहां की राजनीति में आमूल चूल परिवर्तन देखने को मिली।तीन लगातार चुनाव जीत कर सरकार बनाने वाली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से धराशाई हो गई और इसके जीते हुए विधायकों की संख्या घटकर 80 हो गयी। वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में कभी शून्य पर रहने वाली भारतीय जनता पार्टी ने प्रगति करते हुए 0 से 3,3 तीन से 77 और 77 से 208 सीटों पर कब्जा जमा कर अपनी सरकार बना ली। चुनाव हारने के बाद, ममता बनर्जी के हाथों से सत्ता छीन गई तो वही अब की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी टूट की भी प्रबल संभावना बन गई।अब राजनीतिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कई सांसद और विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संपर्क में हैं और पाला बदल सकते हैं।TMC में टूट के संभावनाओं का मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:-

सांसदों और विधायकों की संभावित बगावत: रिपोर्टों में दावा किया गया है कि टीएमसी के 12 से अधिक लोकसभा सांसद और कई विधायक पार्टी नेतृत्व से नाराज होकर बीजेपी के संपर्क में हैं।

स्थानीय स्तर पर इस्तीफे: राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही टीएमसी के भीतर अंदरूनी कलह तेज हो गई है। पार्टी के गढ़ माने जाने वाले इलाकों (जैसे डायमंड हार्बर, भटपारा, और कोटाई) से पार्षदों और स्थानीय नेताओं के सामूहिक इस्त की खबरें सामने आई है।

प्रमुख नेताओं का पार्टी छोड़ना: काकोली घोष जैसे प्रमुख टीएमसी नेताओं का पार्टी के पदों से इस्तीफा देना और कुछ अन्य सांसदों का यूं बीजेपी में शामिल होना पार्टी को कमजोर कर रहा है।

ऑपरेशन लोटस की चर्चा: बीजेपी नेताओं द्वारा लगातार यह दावा किया ,जा रहा है कि टीएमसी के कई विधायक और सांसद जल्द ही ।बीजेपी पार्टी का थाम सकते हैं, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी पार्टी में बड़ी टूट हो सकती है।

भविष्य की अनिश्चितता: चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के फैसलों से कई वरिष्ठ नेता असहज बताए जा रहे हैं, जिसके कारण आने वाले दिनों में टीएमसी में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ सकता
ही।

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