न्यूज़ डेस्क
अंत में वही हुआ जिसकी सम्भावना जताई जा रही थी। रविवार को संसद का उद्घाटन होते ही दिल्ली पुलिस का पहला एक्शन जंतर -मंतर पर हुआ। सबसे पहले पुलिस ने सभी पहलवानो को घसीटकर गिरफ्तार किया और फिर जंतर -मंतर को खाली करा दिया। सभी तम्बू को तोड़ दिया गया। अब शायद ही पहलवान यहाँ प्रदर्शन कर पाएंगे। हालांकि देर रात पहलवानो को छोड़ दिया गया लेकिन पहलवानो पर दंगा भड़काने समेत कई मामले में केस भी दर्ज किया गया है। जिन पहलवानो पर केस दर्ज किये गए हैं उनमे विनेश फोगट ,साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जैसे पहलवान शामिल हैं। ये सभी पहलवान महीने भर से बीजेपी संसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। रविवार को ये सभी पहलवान संसद की तरफ बढ़ रहे थे ताकि किसानो के साथ मिलकर महिला पंचायत कर सके।
दिल्ली पुलिस ने कहा, पहलवान बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट और अन्य आयोजकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। कुछ रेसलर्स देर रात जंतर मंतर पर आए थे लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई और वापस भेज दिया गया।
एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए विनेश फोगाट ने कहा कि नया इतिहास लिखा जा रहा है। फोगाट ने अपने ट्विटर पेज पर लिखा, “दिल्ली पुलिस को यौन शोषण करने वाले बृज भूषण के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने में 7 दिन लगते हैं और शांतिपूर्ण आंदोलन करने पर हमारे ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने में 7 घंटे भी नहीं लगाए क्या इस देश में तानाशाही शुरू हो गई है ? सारी दुनिया देख रही है सरकार अपने खिलाड़ियों के साथ कैसा बर्ताव कर रही है. एक नया इतिहास लिखा जा रहा है.”
रविवार को प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने संसद भवन के सामने महिला सम्मान महापंचायत का ऐलान किया था। पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी थी. इसके बावजूद पहलवानों ने संसद की तरफ एक ‘शांतिपूर्ण मार्च’ किया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। साक्षी मलिक और विनेश फोगाट को कुछ घंटे बाद रिहा कर दिया गया जबकि पुनिया को देर रात में छोड़ा गया। पुनिया ने अपनी पुलिस हिरासत पर सवाल उठाया है। पुनिया ने ट्विटर पर लिखा, मुझे अभी तक पुलिस ने अपनी हिरासत में रखा हुआ है। कुछ बता नहीं रहे. क्या मैंने कोई जुर्म किया है? क़ैद में तो बृज भूषण को होना चाहिये था। हमें क्यों क़ैद करके रखा गया है ?
खिलाड़ियों के खिलाफ जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है, उनमें धारा 147 (दंगा करने), धारा 149 (गैरकानूनी जमावड़ा), 186 (सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालना), 188 (सरकारी कर्मचारी के विधिवत आदेश की अवहेलना), 332 (सरकारी कर्मचारी को चोट पहुंचाना) और 353 (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए आपराधिक बल) के साथ प्रदर्शनकारियों पर सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।
