प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूसीसी प्रहार से विपक्षी एकजुटता संकट में पड़ी

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बीरेंद्र कुमार झा

एक तरफ केंद्र सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता लाने की तैयारी में जुटी हुई है ,वहीं दूसरी तरफ विपक्षी राजनीतिक दल 2924 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए गठबंधन की तैयारी कर रहा है।ऐसे में मोदी सरकार के इस यूसीसी प्रहार ने एकजुट होते विपक्ष के बीच दरार पैदा कर दी है । कुछ विपक्षी राजनीतिक दल यूसीसी के विरोध में खड़े नजर आ रहे हैं तो आम आदमी पार्टी और शिवसेना (UBT) जैसे राजनीतिक दल यूसीसी के पक्ष में भी आ गए हैं। हालांकि कुछ विपक्षी नेताओं को इस बात का भरोसा है कि यूसीसी 23 जून को पटना में मीटिंग के दौरान बनी उनकी एकजुटता पर कोई असर नहीं डाल पाएगा।

सभी मुद्दों पर एक राय होना जरूरी नहीं

कांग्रेस और टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह जरूरी नहीं है कि किसी मुद्दे पर सभी 15 दलों की राय एक समान हो।अब मध्य जुलाई में बेंगलुरु में होने वाली विपक्ष की बैठक में नौकरी,आर्थिक संकट और विपक्षी दलों के शासन वाले प्रदेशों में केंद्र के हस्तक्षेप के आरोप में पर बात होगी।टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सभी 15 दल एक दूसरे की फोटो कॉपी तो है नहीं। उन्होंने कहा कि सभी मुद्दों पर सभी दल का सहमत न होना कोई बड़ी बात नहीं है। पटना में हुई बैठक के बाद दूसरी बैठक में हम सभी उन मुद्दों के साथ जाएंगे जिस पर हमारी 100 फ़ीसदी सहमति है।

मोडस ऑपरेंडी

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पटना में बैठक के दौरान 15 में से 14 राजनीतिक दल कॉमन एजेंडे पर एकता को लेकर सहमत थे।इसमें तय हुआ था कि बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ेंगे। अरविंद केजरीवाल दिल्ली ऑर्डिनेंस पर ही ध्यान दे रहे थे और कांग्रेस से सहयोग चाहते थे। लेकिन ममता बनर्जी और उमर अब्दुल्ला ने हस्तक्षेप किया उमर अब्दुल्ला ने केजरीवाल को बताया इस बैठक में इससे भी कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है। विपक्ष के नेताओं ने इस प्रकार इस बैठक के दौरान यह दिखाया था कि पार्टी विशेष के मुद्दों से कैसे पार पाया जाएगा। इसी प्रकार से आगे भी यूसीसी को लेकर जो असहमति बनेगी उसे भी पाट लेने का प्रयास गठबंधन के द्वारा किया जाएगा।

यूसीसी के जरिए ध्यान भंग करने का है बीजेपी का प्रयास

टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन का दावा है कि यूसीसी के जरिए बीजेपी लोगों का ध्यान भंग करना चाहती है।उन्होंने कहा कि जब आप नौकरियां नहीं दे पा रहे हैं, चीजों के दाम नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं,सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर रहे हैं, अपने वादों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं तभी तो 2024 से पहले इस तरह का दांव खेल रहे हैं।

गौरतलब है कि यूसीसी कानूनों का एक कॉमन सेट होगा जिसमें विभिन्न धर्मों और जनजातियों की प्रथागत कानून समाहित होंगे,साथ ही यह विवाह, तलाक और विरासत जैसे विभिन्न मुद्दों को नियंत्रित करेगा ।संविधान में यह राज्य के नीति – निर्देशक सिद्धांतों का एक हिस्सा है ।साल 2018 में विधि आयोग ने कहा था कि इस स्तर पर यूसीसी न तो जरूरी है और ना ही ऐसी इच्छा होनी चाहिए।

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