जंतर मंतर से शुरू हुए आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा विपक्ष के लिए यह सिर्फ सरकार विरोधी मुद्दा नहीं रहा बल्कि आने वाले चुनावों की राजनीति का संकेत भी बन गया। विपक्ष लंबे समय से बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमलावर रहा है लेकिन इस आंदोलन ने इन मुद्दों को एक बड़े युवा असंतोष के रूप में सामने ला दिया।
कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के दल अब इसे इस नैरेटिव के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं कि से है परीक्षा सुधार, रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की जवाबदेही से जुड़े बड़े राजनीतिक मुद्दे हैं।
आंदोलन ने विपक्ष को यह संदेश भी दिया है कि सोशल मीडिया शुरू हुई आवाज अगर जमीन पर उतरती तो सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। राहुल गांधी का दांव पूरे आंदोलन में राहुल गांधी की भूमिका भी चर्चा में रही। शुरुआत में वह सीधे जंतर-मंतर के आंदोलन का हिस्सा नहीं बने।
हालांकि, कांग्रेस के छात्र संगठन से जुड़े अभियान और युवाओं के मुद्दों पर वह लगातार सरकार को घेरते रहे। जैसे-जैसे आंदोलन बड़ा हुआ, राहुल गांधी ने इसे विपक्ष की बड़ी राजनीतिक लड़ाई से जोड़ना शुरू किया। प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च और धरने में विपक्षी नेताओं की मौजूदगी ने आंदोलन को राष्ट्रीय राजनीतिक संदेश दिया।
SP प्रमुख अखिलेश यादव का आंदोलन से जुड़ना भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए राहुल गांधी और अखिलेश यादव का युवाओं मुद्दे पर साथ खड़ा होना विपक्षी एकता का संदेश देता है। डिंपल यादव के नेतृत्व में SP सांसदों ने 20 जुलाई को संसद से लेकर जंतर मंतर पर मार्च निकाला था और उन्हें हिरासत में भी लिया गया। डिंपल यादव ने लगातार आंदोलकारी छात्रों से संपर्क बनाए रखा। SP लंबे समय से रोजगार और भर्ती जैसे मुद्दों को उठाती रही है। यह आंदोलन यूपी की राजनीति में BJP के खिलाफ विपक्ष को एक नया नैरेटिव देने का मौका दे सकता है।
लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन को भारत के भविष्य की जीत बताया। शनिवार को कहा कि यह लड़ाई अतीत और भविष्य के बीच है और भारत का भविष्य अतीत को हरा देगा। सरकार को शिक्षा व्यवस्था बदलने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। राहुल ने कहा कि छात्रों की दो अन्य मांगों को नहीं भूलना चाहिए। प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वालों और इसे संचालित करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दूसरी मांग के तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।
मंत्री अमित शाह को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए राहुल गांधी आरोप लगाया कि उन्होंने छात्रों पर कार्रवाई को मंजूरी दी। हम अमित शाह को छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने छात्रों पर गोली चलाने और पैलेट गन जैसे हथियारों के इस्तेमाल को अधिकृत किया। छात्रों पर कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती।

