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मंगलवार को कुछ पत्रकारों पर रेड ,आज संजय सिंह के यहाँ छापा ,आगे दर्जनों नेताओं पर लटकी तलवार !

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अखिलेश अखिल 
यह अमृतकाल है। लेकिन किसके लिए अमृतकाल है और किसके लिए विष काल यह कौन बताएगा ? पूरे  देश के नेता ,बीजेपी छोड़कर हर पार्टी के नेता जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। नेताओं की बात छोड़ दें तो पत्रकार भी पकडे जा रहे हैं और बदनाम हो रहे हैं। जो पत्रकार पेट भरने के लिए मेहनत मजदूरी करते फिरता है वह भी जांच के घेरे में हैं। जिन्हे घेरे में होना चाहिए वे सब मौज कर रहे हैं लेकिन जो पत्रकारिता को अभी भी अंजाम दे रहे हैं उन्हें बदनाम किया अजा रहा है और तबाह भी। मंगलवार को कुछ पत्रकारों को पकड़ा गया। जाँच एजेंसिया दस घंटे तक उनसे पूछताछ  करती रही। शाम को कई शर्तों के साथ पत्रकारों को छोड़ा गया तो कुछ पत्रकारों को देतें कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी हो चुकी है। इन पत्रकारों पर कई तरह की धाराएं भी लगाईं गई है।    
                   आज आप नेता संजय सिंह जांच के घेरे में हैं। उनके घर की तलाशी ली जा रही है। उनके सामान को उलटा पुल्टा जा रहा है। कह सकते हैं कि वे अब जांच के दयारे में  आ चुके हैं उनकी उनकी मुसीबत बढ़ेगी यह तय है। कहा जा रहा है कि पांच राज्यों के चुनाव से पहले बहुत से नेताओं को जेल भेजने की तैयारी है। कुछ अभी भेजे जायेंगे तो कुछ राज्यों के चुनाव के बाद जायेंगे। आगे लोकसभा चुनाव है। अगर पांच राज्यों में बीजेपी जीत गई तो खेल और भी दिलचस्प होगा। और बीजेपी हार गई तो खेल और भी विकराल होगा। जानकार कह रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले उन नेताओं को भी जेल में बंद किया जा सकता है जिनकी बड़ी प्रतिष्ठा है। जनता के बीच ज्यादा चर्चित है और पार्टी के बड़े नेता है। ऐसे बहुत से नेता जेल की हवा खा सकते हैं।            
                     विपक्ष का आरोप है कि पिछले दो दशकों में केंद्रीय जांच एजेंसियों के निशाने पर आए गैर-भाजपाई नेताओं का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है। जांच एजेंसियों के फेर में केवल राज्यों के कुछ नेता ही नहीं, बल्कि सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, लालू प्रसाद यादव, मायावती, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, ममता बनर्जी, शरद पवार और के.कविता से लेकर अनेक विपक्षी नेता आ चुके हैं। मौजूदा समय में दर्जनों विपक्षी नेता, जांच एजेंसियों के जाल के बहुत करीब हैं। इनमें से कौन फंसेगा और कौन बचेगा, कुछ नहीं कहा जा सकता। जांच एजेंसी ने पूरी तरह से किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी है। किसी के पास भी पूछताछ के लिए ‘समन’ आ सकता है।             
         तेलंगाना के सीएम केसीआर की बेटी एवं भारत राष्ट्र समिति की नेता के. कविता, ईडी जांच का सामना कर रही हैं। आप के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के सलाखों के पीछे रहने की वजह प्रतिरोध की राजनीति बताई जा रही है। पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस भी निशाने पर हैं। टीएमसी नेताओं से भी पूछताछ हो रही है। एनसीपी और आरजेडी के नेता भी जांच एजेंसियों से नहीं बच सके। केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाली कई विपक्षी पार्टियों ने कुछ माह पहले पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी। इनमें टीएमसी, आप, आरजेडी, नेशनल कांफ्रेंस, केसीआर की पार्टी, सपा और उद्धव बालासाहेब ठाकरे  आदि दल शामिल थे। इन सभी दलों के नेता जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं। 
                      कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के नेता, जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से ईडी पूछताछ कर चुकी है और आगे भी पूछताछ संभव है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल भी ईडी का सामना कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे पार्थ चटर्जी को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। शिवसेना के संजय राउत ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। वे भी जेल में रह कर आए हैं। टीएमसी सांसद अभिषेक से भी पूछताछ जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से ईडी ने पूछताछ की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी जांच का सामना कर रहे हैं। शरद पवार के भतीजे अजित पवार पर मनी लॉन्ड्रिंग के केस रहे हैं। हालांकि अब वे भाजपा के सहयोग से महाराष्ट्र सरकार में डिप्टी सीएम बन गए हैं। पूर्व मंत्री नवाब मलिक, ईडी मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं।
                     यूपी के पूर्व सीएम और सपा नेता अखिलेश यादव का नाम भी माइनिंग घोटाले में आया था। यह मामला सीबीआई के पास है। पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से अवैध रेत खनन मामले में ईडी पूछताछ कर चुकी है। चारा घोटाले में सजा होने के बाद लालू प्रसाद यादव पर रेलवे में जमीन लेकर नौकरी देने का मामले की जांच शुरू हो गई है। कई जगहों पर छापे लग चुके हैं। इसमें सीबीआई और ईडी, दोनों जांच एजेंसियां शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में पीसीसी कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल, भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव, गिरीश देवांगन, आरपी सिंह, विनोद तिवारी और सन्नी अग्रवाल के निवास एवं कार्यालयों पर ईडी की रेड हो चुकी है।
हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के यहां भी जांच एजेंसियों ने दस्तक थी। पूर्व सीएम ओपी चौटाला भी सलाखों के पीछे रहे हैं। आरजेडी के एमएलसी सुनील सिंह, सांसद अशफाक करीम, फैयाज अहमद और पूर्व एमएलसी सुबोध राय भी जांच एजेंसियों की रडार पर हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी ईडी की सुई घूम रही है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल के करीबियों पर ईडी की कार्रवाई जारी है। ममता बनर्जी के खिलाफ चिट फंड मामला है, तो कर्नाटक में डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार भी ईडी के निशाने पर आ चुके हैं। 

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