क्या राहुल को राजनीतिक शहीद दिखाकर बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता को आगे बढ़ाएगी कांग्रेस ?

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अखिलेश अखिल
क्या कांग्रेस राहुल गांधी को सूरत अदालत से मिली दो साल की सजा और सांसदी रद्द होने का कोई बड़ा राजनीतिक लाभ लेने की तैयारी में है ? या फिर कोई लीगल खेल को अपने पक्ष में लाकर बीजेपी को सबक सिखाने का तना बना बन रही है ? ये सवाल इस लिए किये जा रहे हैं कि राहुल मामले को बीते पांच दिन हो गए लेकिन कांग्रेस इस मसले को लेकर ऊपरी अदालत तक नहीं पहुंच सकी है। जिस समय राहुल को सजा मिली थी और सांसदी रद्द की गई थी उस समय लगा था कि कांग्रेस अगले दिन ही इस मसले पर कोई बड़ी कार्रवाई करेगी लेकिन आज पांच दिन गुजर गए ऊपरी अदालत तक मामला नहीं पहुँच सका।

जानकार मान रहे हैं कि राहुल प्रकरण को लेकर कांग्रेस कई स्तर पर काम कर रही है। पहली रणनीति तो कि इस मामले से राहुल गाँधी को कैसे बहार लाया जाए ताकि आगे भी नजीर साबित हो। मानहानि को लेकर बीजेपी और सरकार ने जिस तीब्रता के साथ खेल किया है उसे कैसे रोका जाए ताकि आने वाले समय में इस तरह की कोई और घटना सामने नहीं आये। यह लीगल से जुड़ा मामला है।

इसके लिए कांग्रेस का लीगल सेक्शन बड़े स्तर पर काम भी कर रहा है और हर पहलु पर मंथन भी। सबसे बड़ी बात है कि सूरत कोर्ट का आदेश गुजराती भाषा में है जो करीब डेढ़ सौ पेज से ज्यादा का है। हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए उस गुजराती आदेश को इंग्लिश में जमा करना होता है। उस पर काम चल रहा है। गुजराती आदेश के एक-एक शब्दों का जा रहा है ताकि अदालत में मामला जब रखा जाए तो जीत हासिल हो। हलाकि कांग्रेस जानती है कि ऊपरी अदालत से राहुल को तुरंत ही रहत मिल सकती है लेकिन मामला केवल राहत और जमानत तक सीमित नहीं है। मूल मामला कन्विक्शन को ख़त्म करने का है। जबतक कन्विक्शन ख़त्म नहीं होता है राहुल की सजा को राहत नहीं मिलेगी। यही वजह है कि कांग्रेस पूरी तयारी के साथ इस मामले पर मंथन कर रही है।

लेकिन कई जानकार यह भी मान रहे हैं कि कांग्रेस अब इस मामले को राजनीतिक स्तर पर लड़ने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस को लग रहा है कि राहुल के नाम पर जो विपक्षी दल साथ आने से कतरा रहे थे अब राहुल की सजा और सांसदी रद्द के बाद साथ आ रहे हैं। यह साथ कांग्रेस के लिए भी जरुरी है और विपक्षी दलों के लिए जरुरी है। इस एकता को कांग्रेस गवाना नहीं चाहती। कांग्रेस जानती है कि विपक्षी एकता के साथ ही बीजेपी को हराया जा सकता है।

जानकार यह भी मान रहे हैं कि कांग्रेस तीन वजहों से अभी कोर्ट जाने में देरी कर रही है। पहली बात तो यही है कि कोर्ट जाने के बाद भी तुरंत सूरत कोर्ट के फैसले यानी कन्विक्शन पर रोक नहीं लग जाएगी। इससे राहुल गांधी को और भी नुकसान हो सकता है। ऐसे में काफी सोंच समझ कर कांग्रेस अगला कदम उठाएगी।

दूसरी बात है कि कांग्रेस इस बात पर भी मंथन कर रही है कि इस मसले को कोर्ट में ले जाने का लाभ है या फिर राजनीतिक लड़ाई में लाभ है ?अगर राहुल की संसद सदस्यता बहाल नहीं होती तो कांग्रेस उन्हें शहीद की तरह लोगों के पास ले जाएगी। इसकी वजह है कि पहले भी कई नेताओं ने इस तरह के बयां दिए थे ,लेकिन कार्रवाई सिर्फ राहुल के खिलाफ हुई थी। इस खेल के जरिये कांग्रेस अपनी राजनीतिक ताकत को आगे बढ़ाना चाहती है।

तीसरी बात ये भी कि विपक्षी एकता में राहुल गाँधी सबसे बड़ा रोड़ा रहे हैं। कई दल राहुल की वजह से ही कांग्रेस से दूर भागते रहे हैं। ऐसे में संभव है कि कांग्रेस ,बीजेपी को 2024 में जीतने से रोकने और विपक्षी एकता के लिए अभी कोर्ट जाए भी नहीं। इससे राहुल गाँधी की सदस्यता तो चली जाएगी लेकिन सभी विपक्षी दल एक हो जायेंगे। इससे कांग्रेस के साथ ही विपक्षी दलों को भावनात्मक वोट मिल सकता है। फिर चुनाव के बाद गठबंधन की सरकार बनते ही राहुल गाँधी के लिए कोई रास्ता निकाल दिया जाएगा।

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