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आखिर कैसरगंज सीट को लेकर बीजेपी के पसीने क्यों छूट रहे हैं ?

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न्यूज़ डेस्क 
वैसे तो इस बार पुरे यूपी में ही बीजेपी और इंडिया गठबंधन के बीच सियासी लड़ाई कुछ ज्यादा ही तल्ख़ है लेकिन कुछ सीटों को लेकर बीजेपी के भीतर भी परेशानी बढ़ी हुई है। ऐसी ही सीटों में से एक सीट है कैसरगंज सीट।

इस सीट से अभी तक चुनाव लड़ते और जीतते रहे हैं बीजेपी के बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह। बीजेपी ने  तक कोई उम्मीदवार को नहीं उतारा है। हालांकि बृजभूषण सिंह अभी भी चुनाव लडने को तैयार हैं लेकिन पहलवान महिलाओं के साथ हुए मामले को लेकर बीजेपी बृजभूषण सिंह को अभी तक टिकट नहीं दिया है। 

सूबे की सियासी तपिश के केंद्र कैसरगंज को लेकर मंथन राजधानी से लेकर दिल्ली तक चल रहा है। प्रत्याशी तय करने में पार्टियां नफा- नुकसान पर इतनी गंभीर हैं कि नाम तय करने में पसीना छूट रहा है।

अंतिम दौर में पहुंचे नामांकन में अब प्रत्याशी तय करना मजबूरी सा हो गया है। भाजपा ही नहीं तीनों दलों में घमासान मचा है कि आखिर कमान किसके हाथ में दी जाए, जिससे राजनीतिक इज्जत बची रहे। इसी दांव में भाजपा ने नई राह निकाली है। इसमें किसी दिग्गज को या फिर महिला नेतृत्व के हाथ में क्षेत्र की कमान दी जा सकती है।


बुधवार को पूरे दिन सियासी पारा इसी के आसपास उठता-गिरता रहा। कैसरगंज की नुमाइंदगी कर रहे सियासी अखाड़े के दिग्गज से भाजपा ने आंख क्या फेरी, दावा तय करने में देरी की इंतहां हो गई। सजे मैदान में सियासी सेना पूरे एक माह से कदमताल कर रही है।


सेनापति के न होने से जंग छिड़ ही नहीं पा रही। कैसरगंज के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि कोई दल प्रत्याशी तय करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। बुधवार को राजनीतिक गलियारों में कई नाम सामने आते रहे, यह अलग बात रही कि किसी नाम पर मुहर नहीं लग सकी।

दिल्ली की बैठक का जिक्र जोरों पर रहा कि अब कर्नाटक की घटना के बाद नारी नेतृत्व के हाथ में कैसरगंज की चाभी दी जाए। इसके लिए समाजवादी घराने की बहू जो भगवा रंग धारण किए हैं का नाम भी चर्चा में रहा। वहीं स्थानीय सियासी घराने का नाम भी सुर्खियों में आया।

 देर शाम तक सिर्फ नामों की चर्चा रही। इसी बीच प्रदेश सरकार के एक डिप्टी का नाम भी तैरता रहा।  समय कम हाेने से सभी को जल्द फैसले की उम्मीद है। अब एक ही बात की चर्चा है कि आखिर किसके हाथ में फूल महकेगा।

बात सपा की करें तो चार संभावितों ने नामांकन पत्र तो लिया है, लेकिन अभी दाखिल करने की हरी झंडी नहीं मिली है। सपा भी भाजपा के दांव का अंतिम समय तक इंतजार करने के मूड में दिख रही है, वहीं बसपा भी किसी का इंतजार ही कर रही है। वह भी शुक्रवार के पहले पूरा हो जाएगा।

अब यहां देखना अहम होगा कि इस इंतजार में बेकरार कौन होता है। इसी पर पूरे समीकरण का दारोमदार टिका है। ऐसा भी हो सकता है कि बेकरारी बगावत तक पहुंच जाए।

कैसरगंज में प्रत्याशी तय करने के चले जा रहे दांवपेच में फर्जीवाड़ा भी हो रहा है। बुधवार दोपहर अचानक भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव की ओर से कैसरगंज सीट के प्रत्याशी तय करने का फर्जी पत्र जारी हो गया। इससे लोग दंग रह गए। राजनीतिक जोड़- घटाव में शुरू हो गया।

चंद समय बाद ही फर्जी सूची में शामिल शख्स लाइव आया और सूची को सिरे से खारिज किया। एफआईआर की चेतावनी के साथ ही नाम बदनाम करने की साजिश करार दिया। यह पत्र क्यों जारी हुआ, इसे लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। कहा तो यह जा रहा है कि यह भी बड़ा खेल था।

टिकट तय होने की दौड़ लखनऊ से लेकर दिल्ली तक चल रही है। सीएम के महाराष्ट्र चुनावी रैली में होने के कारण पार्टी के दिग्गज नेताओं को मायूसी ही हाथ लगी, वहीं दिल्ली से भविष्य तय होने की चर्चाएं जोर पकड़े रहीं। माना जा रहा है कि दिल्ली के दिग्गज बड़े फैसले की ओर बढ़े हैं।

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