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फारुख अब्दुल्ला ने क्यों कहा कि बांग्लादेश का संघर्ष हर तानाशाह के लिए सबक है 

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न्यूज़ डेस्क 
बांग्लादेश में तख्तापलट हो गया है। देश की प्रधानमंत्री शेख हसीना प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत में शरण लिए हुए हैं। इधर भारत भी बांग्लादेश की हर राजनीति पर नजर लगाए बैठा है। आज ही केंद्र सरकार की  सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है जिसमे बांग्लादेश में चल रही घटनाओं की जानकारी सरकार की तरफ से सभी दलों को दी गई है। 

बांग्लादेश में जारी राजनीतिक संकट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि बांग्लादेश में चल रहा संघर्ष हर तानाशाह के लिए एक सबक है।उन्होंने कहा कि, “बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था खराब है। बेरोजगारी का स्तर बढ़ा हुआ है। छात्रों ने एक ऐसे आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसे सेना सहित किसी के द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सका। ये सिर्फ बांग्लादेश के लिए ही नहीं, बल्कि हर तानाशाह के लिए एक सबक है। एक समय आएगा, जब लोग धैर्य खो देंगे, वही हुआ है, हमें सावधान रहना होगा। मुझे उम्मीद है कि वे हमारे साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखेंगे।”

फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “बांग्लादेश में यह भावना थी कि दुनिया में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई जानी चाहिए। शेख हसीना दुनिया भर में मुसलमानों के उत्पीड़न के खिलाफ खड़ी नहीं हुईं, इसके परिणामस्वरूप उन्हें अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। अगर वह (शेख हसीना) वहां से नहीं भागतीं, तो उन्हें भी मार दिया जाता।”

शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और देश छोड़ने के बाद भी बांग्लादेश में हिंसा की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।अब उपद्रवी अल्पसंख्यक हिंदुओं, शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग के समर्थकों व उनके प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं।

बांग्लादेश के हालात को लेकर केंद्र सरकार द्वारा सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को बांग्लादेश के हालात की जानकारी देते हुए आश्वासन दिया कि पड़ोसी देश पर सरकार की पैनी नजर बनी हुई है।

बैठक में बांग्लादेश में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी जानकारी दी गई। बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने इस मसले पर सरकार के साथ खड़े होने का भरोसा दिया।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह जानकारी भी दी कि, बांग्लादेश में 20 हजार भारतीय थे, इसमें से ज्यादातर छात्र थे। सरकार द्वारा एडवाइजरी जारी करने के बाद उसमें से 8 हजार छात्र भारत लौट आए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार बांग्लादेश की सेना के संपर्क में है। वहां स्थिति लगातार बदल रही है और आगे जैसे-जैसे बदलाव होगा, सरकार इसके बारे में फिर से जानकारी देगी।

शेख हसीना के बारे में बताया गया कि उन्हें थोड़ा समय देना चाहिए और उन्हें स्वयं ही यह फैसला करना है कि वह कहां जाना चाहती हैं।

बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, जेपी नड्डा, किरेन रिजिजू, एचडी कुमारस्वामी, राजीव रंजन सिंह, विपक्षी सांसद केसी वेणुगोपाल और सुप्रिया सुले सहित अन्य शामिल हुए।

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